सुप्रीम कोर्ट का फैसला: छोटे वाहन धारकों के लिए बड़ी राहत, बीमा कंपनियों ने पीटा माथा

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए लाइट मोटर व्हीकल (LMV) ड्राइविंग लाइसेंसधारकों को 7,500 किलो तक वजन वाले हल्के ट्रांसपोर्ट वाहनों को चलाने की अनुमति दे दी है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। ऐसा माना जा रहा है कि बीमा कंपनियों के लिए यह फैसला एक झटका साबित हो सकता है।

एक एक्सीडेंट से शुरू हुआ था पूरा मामला

दरअसल, 2017 में मुकुंद देवांगन एक हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला रहे थे, जब उनका एक्सीडेंट हो गया। एक्सीडेंट के बाद इंश्योरेंस के लिए जब पीड़ित मुकुंद देवांगन ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी में दावा किया तो कंपनी ने यह कहते हुए कि उनका लाइसेंस सिर्फ हल्के निजी वाहनों के लिए था, न कि कमर्शियल या ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए, क्लेम देने से मना कर दिया।

इसके बाद मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में तक पहुँच गई। सुप्रीम कोर्ट में प्रमुख मुद्दा यह था कि क्या एक व्यक्ति जिसके पास LMV का ड्राइविंग लाइसेंस है, वह टैक्सी, ऑटो-रिक्शा, या वाणिज्यिक वाहनों जैसे ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकता है या नहीं। वहीं, 7 साल बाद आज, यानी 6 नवंबर को तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाया कि ऐसे ट्रांसपोर्ट व्हीकल, जिनका कुल वजन 7,500 किलो से ज्यादा नहीं है, उन्हें LMV यानी लाइट मोटर व्हीकल की परिभाषा से बाहर नहीं किया जा सकता। लिहाजा, अब सुप्रीम कोर्ट ने लाइट मोटर व्हीकल (LMV) ड्राइविंग लाइसेंसधारकों को 7,500 किलो तक वजन वाले हल्के ट्रांसपोर्ट वाहनों को चलाने की अनुमति दे दी है।

सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े और सुप्रीम कोर्ट का विचार

भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में करीब 1.7 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवाते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण LMV लाइसेंसधारकों द्वारा हल्के ट्रांसपोर्ट वाहनों का संचालन नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटनाओं के पीछे लापरवाही से गाड़ी चलाना, तेज रफ्तार, सड़क का डिज़ाइन, और यातायात नियमों का उल्लंघन जैसे कारण शामिल हैं।

फैसले का असर और बीमा कंपनियों की प्रतिक्रिया

बीमा कंपनियां हादसों में एक निश्चित वजन के ट्रांसपोर्ट वाहन के शामिल होने और ड्राइवरों के लाइसेंस की वैधता के आधार पर क्लेम खारिज कर रही थीं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय बीमा कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि अब वे LMV लाइसेंसधारकों को 7,500 किलो तक के ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने के मामले में क्लेम खारिज करने का आधार नहीं बना सकतीं।

फैसले के प्रमुख बिंदु

1. LMV और ट्रांसपोर्ट व्हीकल पूरी तरह से अलग श्रेणी नहीं हैं; दोनों के बीच ओवरलैप मौजूद है।

2. खतरनाक सामान ले जाने वाले वाहनों पर विशेष पात्रता आवश्यक रहेगी।

3. सड़क दुर्घटनाओं में ज्यादातर कारण तेज स्पीड, लापरवाही से गाड़ी चलाना, और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हैं, न कि हल्के ट्रांसपोर्ट वाहनों का संचालन।

 

यह निर्णय न केवल बीमा कंपनियों के दृष्टिकोण को चुनौती देता है, बल्कि इससे उन ड्राइवरों को भी राहत मिलेगी जो हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।

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