Article 370: क्या J&K में धारा 370 वापस? विधानसभा में प्रस्ताव पास, BJP ने किया बवाल

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Article 370: इस आर्टिकल में आज जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा धारा 370 की बहाली के लिए पास किए गए प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे। साथ ही जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे (धारा 370) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, 2024 विधानसभा चुनावों के परिणाम, इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति को कैसे नया मोड़ दिया और क्या भविष्य में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे (धारा 370) की वापसी की क्या संभावनाएं हैं, इसपर भी चर्चा करेंगे।

जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का इतिहास

सबसे पहले हमारे लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर धारा 370 का इतिहास क्या है। दरअसल, भारत की स्वतंत्रता के समय, 15 अगस्त 1947 को जहां देश आजाद हुआ, वहीं जम्मू-कश्मीर का भविष्य अधर में लटका हुआ था। उस समय जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत या पाकिस्तान में से किसी के साथ राज्य के विलय का निर्णय नहीं लिया था। हालांकि, 24 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान के समर्थन से कबायली लड़ाकों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया। इसके बाद, 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद की गुहार लगाई और विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारतीय सेना ने राज्य में प्रवेश कर कबायली आक्रमणकारियों को पीछे हटाने की कार्रवाई शुरू की।

17 अक्टूबर 1949 को भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 को शामिल किया गया, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया। यह अनुच्छेद राज्य को स्वायत्तता प्रदान करता था, जिसके अंतर्गत राज्य का अपना संविधान था और केंद्र के केवल कुछ कानून ही राज्य पर लागू होते थे। इसके बाद 1951 में जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा का गठन हुआ, जिसने राज्य के लिए अपना संविधान बनाया, जिसमें जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय स्थायी था, लेकिन कुछ मामलों में भारत का अधिकार सीमित था।

1954 में अनुच्छेद 35A के तहत जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार दिए गए, जैसे भूमि खरीदने, सरकारी नौकरियों में भागीदारी और अन्य सुविधाएं। यह विशेष दर्जा दशकों तक भारतीय संविधान का हिस्सा रहा, लेकिन 5 अगस्त 2019 को भारतीय सरकार ने इसे रद्द कर दिया और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया।

2024 विधानसभा चुनाव: नए समीकरण और परिणाम

धारा 370 के मुद्दे को लेकर भारतीय राजनीति हमेशा से प्रभावित रही है। लेकिन धारा 370 के हटने के बाद, इस बार के चुनाव में बड़ा फेरबदल हुआ। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव 2024 के परिणाम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरण स्थापित किए। 90 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों की आवश्यकता थी, और इस बार नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सबसे अधिक 42 सीटें जीतकर 23.43% वोट शेयर प्राप्त किया। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 29 सीटें हासिल की और 25.64% वोट शेयर प्राप्त किया, जो उसे दूसरे स्थान पर लाता है।

कांग्रेस ने इस बार 6 सीटें जीतीं और 11.97% वोट शेयर प्राप्त किया, जबकि पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) को केवल 3 सीटें मिलीं और उनका वोट शेयर 8.87% रहा। वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी एक सीट पर जीत दर्ज की और 0.52% वोट प्राप्त किए। इन चुनावों ने स्पष्ट कर दिया कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बदलाव आ रहा है और भविष्य में गठबंधन की संभावनाएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में धारा 370 की वापसी का प्रस्ताव

वहीं, जम्मू-कश्मीर की राजनीति के बदले समीकरणों के नतीजन, आज जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अनुच्छेद 370 की वापसी के लिए एक प्रस्ताव पास किया। इस प्रस्ताव को जम्मू-कश्मीर के डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने पेश किया, जिसमें कहा गया कि राज्य का विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) और संवैधानिक गारंटियां महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर की पहचान, संस्कृति और लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि विधानसभा ने 2019 में केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने पर चिंता व्यक्त की थी और अब इसे बहाल करने की आवश्यकता है। इस प्रस्ताव के समर्थन में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, और अन्य निर्दलीय विधायक भी आए, जबकि बीजेपी ने इसका विरोध किया। बीजेपी का आरोप था कि प्रस्ताव को बिना विधायकों से राय-मशविरा किए ही तैयार किया गया था।

बीजेपी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, विधानसभा में फाड़े पर्चे

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बिजेपी विधायक सुनील शर्मा और अन्य विधायकों ने स्पीकर पर आरोप लगाया कि उन्होंने खुद ही प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया और मंत्रियों की बैठक बुलाकर इसे मंजूरी दी। बीजेपी विधायक हंगामा करते हुए प्रस्ताव की कॉपियाँ फाड़ते गए, जबकि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर पुतले फूंके। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विधानसभा ने अपना काम कर दिया है और अब केंद्र को इसे गंभीरता से देखना चाहिए।

क्या होगा भविष्य ?

यह प्रस्ताव पास होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए बदलावों की शुरुआत हो चुकी है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य दलों का जोर इस बात पर है कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा फिर से बहाल किया जाए, और इसे केवल राज्य की पहचान और संस्कृति की सुरक्षा के रूप में नहीं, बल्कि एक संवैधानिक आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम संविधान के खिलाफ है और भारतीय संघ के मूल सिद्धांतों से टकराता है। भविष्य में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के प्रयासों में और राजनीति का बड़ा मोड़ देखने को मिल सकता है।

क्या धारा 370 होगी बहाल ?

आज का दिन जम्मू-कश्मीर के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, जहां विधानसभा ने धारा 370 की बहाली का प्रस्ताव पास किया, जबकि इससे पहले 2024 के विधानसभा चुनावों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरण स्थापित किए। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को किस दिशा में ले जाती है और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आगामी समय में क्या बदलाव आते हैं।

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