नारी सशक्तिकरण की मिसाल हैं सब इंस्पेक्टर गीता सिंह- तुरंत पढ़िए महिलाओं के लिए सबसे बड़ा संदेश

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कानपुर। नारी सशक्तिकरण केवल नारों और अभियानों तक सीमित न रह जाए, इसके लिए समाज में ऐसी महिलाएं भी हैं जो स्वयं उदाहरण बनकर दूसरों को राह दिखा रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल हैं सब इंस्पेक्टर गीता सिंह, जो पिछले तीन दशक से उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में सेवाएं दे रही हैं। किसान परिवार से निकलकर पुलिस सेवा तक का सफर तय करने वाली गीता सिंह आज मिशन शक्ति-05 को सफल बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं।

विनम्र पृष्ठभूमि से मजबूत पहचान तक का सफर 

मूल रूप से वाराणसी (बनारस) की रहने वाली गीता सिंह का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। परिवार की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति ने उन्हें पहले पुलिस विभाग में सिपाही के तौर पर भर्ती कराया। इसके बाद उन्होंने दरोगा भर्ती परीक्षा पास की और सब इंस्पेक्टर बनीं। आज वह कानपुर के गोविंदनगर थाने की दादानगर चौकी प्रभारी के रूप में तैनात हैं।

महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत संदेश 

गीता सिंह का मानना है कि महिलाओं को केवल सुरक्षा की उम्मीद दूसरों से नहीं करनी चाहिए, बल्कि खुद को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। उनका कहना है— “कोई भी मिशन तभी सफल होता है जब सामने वाले का आत्मविश्वास मजबूत हो। महिलाओं को अपनी ताकत पहचाननी होगी और खुद को सशक्त बनाना होगा।”

उनकी यह सोच छात्राओं और युवतियों के लिए प्रेरणादायक है। वे विभिन्न कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों में जाकर लड़कियों को आत्मरक्षा और आत्मविश्वास के महत्व के बारे में बताती हैं।

मिशन शक्ति-05 में सक्रिय भूमिका निभाने की है जरुरत 

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे मिशन शक्ति-05 अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बेटियों को सुरक्षित और जागरूक बनाना है। गीता सिंह इस मिशन को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। वह अपने स्तर से महिलाओं और छात्राओं को न केवल सुरक्षा के प्रति जागरूक करती हैं, बल्कि उन्हें यह संदेश भी देती हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए खुद पर भरोसा करना जरूरी है।

समय के साथ बदलाव की बड़ी जरूरत

पुलिस सेवा के अपने लंबे अनुभव के आधार पर गीता सिंह कहती हैं कि समाज में बदलाव तभी संभव है जब महिलाएं खुद बदलने का संकल्प लें। उनका मानना है कि महिलाओं को समय के साथ चलना चाहिए और खुद को हर परिस्थिति के लिए तैयार करना चाहिए। यही वजह है कि वे हमेशा कहती हैं— “आप तभी दूसरों की सुरक्षा कर पाएंगे जब खुद समय के साथ बदलाव लाएंगे।”

ग्रामीण महिलाओं में है जागरूकता की कमी

हालांकि गीता सिंह यह भी मानती हैं कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की जागरूकता का स्तर अभी भी कम है। वहां की महिलाएं आज भी कई सामाजिक बंधनों में जकड़ी हुई हैं। वह बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

आत्मविश्वास ही सशक्तिकरण की कुंजी

गीता सिंह का जीवन संदेश यही है कि नारी सशक्तिकरण केवल बाहरी प्रयासों से नहीं बल्कि आंतरिक आत्मविश्वास से आता है। जब महिलाएं खुद को मजबूत मानेंगी तभी वे समाज में अपनी पहचान बना सकेंगी।

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