Navratri Special: 51 शक्तिपीठों में से एक है हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा का चामुंडा देवी मंदिर, जानिए पूरी कहानी
मंदिर के आस-पास की प्राकृतिक सुंदरता इसे एक पिकनिक स्पॉट भी बनाती है। हर साल देशभर से हजारों भक्त और सैलानी यहां माता के दर्शन और प्रकृति का आनंद लेने के लिए आते हैं।
यह है धार्मिक महत्व और मान्यता
चामुंडा देवी मंदिर शक्ति और आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से आते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। भक्त माता चामुंडा के चरणों में अपने भावनाओं के पुष्प अर्पित करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
यह मंदिर मुख्यतः माता काली को समर्पित है। माता काली को शक्ति और संहार की देवी माना जाता है। जब-जब पृथ्वी पर संकट आया है, तब-तब माता ने राक्षसों और दानवों का विनाश कर धर्म की रक्षा की है।
पढ़िए कैसे हुई चामुंडा नाम की उत्पत्ति
देवी महात्म्य* और *दुर्गा सप्तशती के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच सौ वर्षों तक युद्ध हुआ, तब असुरों ने विजय प्राप्त की। असुरों का राजा महिषासुर देवताओं को स्वर्ग से निकालकर स्वयं इंद्रासन पर बैठ गया। इसके बाद देवता धरती पर सामान्य मनुष्यों की तरह जीवन व्यतीत करने लगे।
असुरों द्वारा किए गए अत्याचारों से दुखी होकर देवता भगवान विष्णु के पास पहुँचे। विष्णु ने उन्हें देवी की आराधना करने का परामर्श दिया। इसके परिणामस्वरूप ब्रह्मा, विष्णु और महेश – तीनों के तेज से एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ। वह प्रकाश एक देवी के रूप में परिणत हुआ। इसी देवी ने चंड और मुण्ड नामक राक्षसों का वध किया। तभी से उन्हें *चामुंडा* कहा जाने लगा।
भक्तों की रहती है आस्था
हर वर्ष नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। कहा जाता है कि माता चामुंडा सच्चे मन से की गई प्रार्थनाओं को अवश्य सुनती हैं। इसीलिए यहां आने वाले भक्त अपनी समस्याओं से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति पाने की कामना करते हैं।
जानिए पर्यटन और सुविधाएँ
चामुंडा देवी मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यहां सुविधाओं की अच्छी व्यवस्था की गई है। धर्मशाला और कांगड़ा शहर से इस मंदिर तक सड़क मार्ग के जरिए आसानी से पहुँचा जा सकता है। आसपास ठहरने और भोजन की भी पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है।
इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर के निकट अनेक धार्मिक स्थल और प्राकृतिक दर्शनीय स्थल भी हैं। इसलिए यहां आने वाले पर्यटक एक धार्मिक यात्रा के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुभव कर सकते हैं।