Pilibhit: विश्व हिंदू रक्षा परिषद जिलाध्यक्ष सहित 4 पर मुकदमा दर्ज, रंगदारी मांगने के आरोप पर बवाल

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Pilibhit में विश्व हिंदू रक्षा परिषद जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह समेत 4 पर मुकदमा, 20 हजार की रंगदारी मांगने और मारपीट के आरोप से बवाल मचा।

Pilibhit में गौशाला विवाद: विश्व हिंदू रक्षा परिषद जिलाध्यक्ष समेत चार पर मुकदमा दर्ज

पीलीभीत जिले के विकासखंड मरौरी की ग्राम पंचायत पंडरी में गौशाला को लेकर छिड़ा विवाद अचानक संगीन हो गया। शुक्रवार शाम इस विवाद ने ऐसा मोड़ लिया कि विश्व हिंदू रक्षा परिषद के जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह और उनके तीन साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मामला सिर्फ एक गौवंश की मौत से शुरू हुआ था, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप की आंधी ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया।

Pilibhit: घटना क्रम

ग्राम प्रधान के पुत्र कमल कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि गौशाला में एक गौवंश की मृत्यु हो गई थी। इसी के बाद शुक्रवार को विश्व हिंदू रक्षा परिषद जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह अपने तीन साथियों के साथ मौके पर पहुँचे। आरोप है कि उन्होंने गौशाला में खामियाँ गिनाने के बहाने प्रधान पक्ष पर दबाव बनाया।

कमल कुमार का आरोप है कि यशवंत सिंह और उनके साथियों ने उनसे 20 हजार रुपये की रंगदारी मांगी। जब इसका विरोध किया गया तो कथित तौर पर मारपीट की गई और जेल भिजवाने की धमकी भी दी गई।

Pilibhit:प्रशासन की भूमिका

घटना की सूचना पाकर अधिकारी मौके पर पहुँचे और गौशाला का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने वहां की व्यवस्थाओं को संतोषजनक पाया। इसके बाद थाना न्यूरिया पुलिस ने प्रधान पुत्र की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया।

इस संबंध में पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) सदर ने बताया कि मामला देर शाम का है। मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

Pilibhit:आरोप-प्रत्यारोप

जहां ग्राम प्रधान पक्ष इस घटना को अपनी प्रताड़ना बता रहा है, वहीं विश्व हिंदू रक्षा परिषद जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने तहसीलदार की मौजूदगी में गौशाला का निरीक्षण किया और किसी भी तरह की अवैध मांग नहीं की। उनका आरोप है कि दबाव बनाने और बदनाम करने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है।

Pilibhit: व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण

राजनीति का यह अजीब रंग है कि लोग नाम चमकाने की होड़ में हर मौके का फायदा उठाने से पीछे नहीं हटते। कभी गौशाला की दुर्दशा तो कभी पशुओं की मौत — इन घटनाओं को बहाना बनाकर नेता और संगठन अपने कद को बड़ा दिखाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब कदम गलत उठ जाते हैं और प्रशासन का डंडा घूमता है, तो यही लोग शेर की तरह दहाड़ने वाले अचानक बिल में छिपने वाले चूहे बन जाते हैं। यह सिलसिला बताता है कि नाम कमाने की राजनीति अक्सर जनता और शासन दोनों को बदनाम करने का जरिया बन जाती है।

पंडरी की गौशाला विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि छोटे से मुद्दे कैसे बड़े सियासी झगड़ों में बदल जाते हैं। अब देखना यह होगा कि जांच में सच किसके पक्ष में जाता है — ग्राम प्रधान के बेटे के आरोपों में या जिलाध्यक्ष के बचाव में। लेकिन इतना तय है कि इस विवाद ने प्रशासन से लेकर राजनीति तक हर स्तर पर हलचल मचा दी है।

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