ऑनलाइन खरीदारी तोड़ रही रिकार्ड – जानिए खुले बाजारों के क्या हैं हालात
रिपोर्ट – सुहेल अंसारी – कानपुर नगर
Kanpur News – पितृ पक्ष यानी गरू दिन खत्म होने के बाद शुभ नवरात्रि के साथ-साथ दशहरा का त्योहार भी है। ऐसे में व्यापारी और दुकानदार बाजार में ग्राहकों की रौनक के इंतजार में थे, लेकिन लगता है कि उनके इंतजार पर ऑनलाइन शॉपिंग ने पानी फेर दिया है। क्योंकि नवरात्रि की शुरुआत से से लेकर अभी तक के कानपुर शहर में करीब 50 करोड़ का ऑनलाइन कारोबार हो चुका है। जिसके चलते एक्सपर्ट की माने तो इस वर्ष दीपावली तक के ऑनलाइन खरीदारी 500 करोड़ के आसपास पहुंच जाएगी। जो कि पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्राहक ने मोड़ा मुँह
ऑनलाइन कंपनियां भी ग्राहकों के लिए त्यौहार के मौसम में फेस्टिवल ऑफर लेकर आते हैं। जिन ऑफर के चलते ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग की तरफ झुका सा चला जाता है। कुछ ऑनलाइन समान आपकी सोच से भी सस्ते होते हैं। लेकिन कुछ सामान महंगे होने के बाद भी मार्केट से ज्यादा भी ऑनलाइन बिक रहे हैं। क्योंकि इनके पास हर वो चीज उपलब्ध है जो दैनिक उपयोग में या फिर किसी अन्य कार्यों में होती है वो सब इनके पास मिल जाती हैं।
थोक बाजार में भी पड़ा फर्क
ऑनलाइन शॉपिंग का फर्क कानपुर के बाजारों में साफ देखा जा सकता है। कानपुर में आधा दर्जन के करीब थोक रेडीमेड मार्केट है। जिसकी स्थितियां दिन पर दिन खराब होती जा रही है। आलम यह है कि दुकानदार पर दुकान का किराया और बिजली का बिल देने के लाले लगे हुए हैं।
इलेक्ट्रिक बाजार में सन्नाटा
वहीं अगर दीपावली को रौशनी से हमारे घर को जगमग करने वाले इलेक्ट्रिक मार्केट की बात करें तो उनकी भी स्थिति ठीक नहीं है। वह फिर क्यों न कानपुर की थोक बाजार मनीराम बगिया हो या फिर बिरहाना रोड हो। हर जगह छोटी बड़ी बाजारों से भी ग्राहक नदारद नजर आ रहे है।
सुनिए दुकानदार का सच
हमने बात की परेड स्थित अतुल शर्मा से। जिनकी अतुल रेडियो के नाम से दुकान है उनका कहना है कि ऑनलाइन बाजार से दुकानदारों को बहुत बड़ा फर्क पड़ा है और सरकार को इस पर कोई बड़ा कदम उठाना चाहिए, नहीं तो दुकानदारों की दशा और भी खराब हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई कई दिन बीत जाते हैं बोनी भत्ते तक नही होते। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई घर का खर्चा और दुकान का खर्चा बिजली का बिल जमा करने के लिए लाखों जतन करने पड़ते हैं, जो सेविंग बची थी वो अब पूरी खर्च हो चुकी है। अंत में उनका कहना था कि अब जो भी कोई कुछ कर सकता है तो बस सरकार ही कुछ कर सकती है।