Kannauj News : शारदीय नवरात्रि पर सजने लगे मां के दरबार, देखें सात बहने आखिर कैसे बनी देवी जाने इनके देवी बनने का राज

0
IMG-20231014-WA0018
( कन्नौज से हिमांशु तिवारी की स्पेशल रिपोर्ट )
शारदीय नवरात्र में अब कल से शुरू होने को हैं। जिसको लेकर मंदिरों से लेकर घर और बाजारों में हर कहीं उत्सव का माहौल है। एक तरफ शनिवारी आज अमावस्या पर पितरों की विदाई हो रही है तो दूसरी तरफ कल से होने वाले मां के नवरात्र के आगमन को लेकर मंदिरों और घरों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मां आदि शक्ति के स्वागत के लिए पौराणिक मंदिरों को सजाने संवारने का काम युद्धस्तर पर जारी है। जिले मे सात देवियों का इतिहास सबसे बड़ा चर्चा का विषय है । कन्नौज के महाराजा वेणुचक्र की 7 कन्याएं जो आज इत्र नगरी पर सातों देवियों के रूप मे अपनी असीम कृपा बरसा रही है। जिस कारण इत्र नगरी कन्नौज आज भी देश–विदेशों में विख्यात है

आपको बताते चलें कि 15 अक्टूबर दिन रविवार को घरों में कलश स्थापना के साथ आदि शक्ति की उपासना का पर्व शुरू हो जाएगा। पौराणिक मंदिरों में होने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर पुलिस ने भी सुरक्षा संबंधी सभी तैयारियां चाक-चौबंद कर ली हैं। इस बार नवरात्र महानवमी 23 अक्तूबर को होगी।वहीं दशहरा पर्व 24 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जाएगा। शक्ति के पूजन के लिए प्रमुख पौराणिक मंदिरों में रंगाई पुताई व सजावट का काम युद्धस्तर पर जारी है।कन्नौज इत्र नगरी में स्थित ऐतिहासिक सिद्धपीठ माँ फूलमती देवी मंदिर में शिखर मिश्रा, अध्यक्ष मंदिर समिति की देखरेख में मंदिर में रंगाई पुताई व मां के दरबार को भव्य रूप प्रदान करने का काम जारी रहा। अध्यक्ष मंदिर समिति के शिखर मिश्रा ने बताया कि शनिवार देर रात तक सभी तैयारियां पूरी हो जाएंगी।

जाने इस मंदिर का प्राचीन इतिहास

इत्र और इतिहास की नगरी में स्थित ऐतिहासिक सिद्धपीठ माता फूलमती देवी मंदिर की मान्यता जिले के अलावा देश के कई राज्यों में है। नवरात्र के दिनों में यहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित माता फूलमती प्रतिमा का नीर (स्नान कराए गए पानी) आंखों की ज्योति को बढ़ाता है। महाराजा वेणुचक्र की सात पुत्रियों में से एक फूलमती देवी का मंदिर कन्नौज-मकरंद नगर मार्ग पर स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार माता फूलमती के पिता वेणु कन्नौज के राजा थे। राजा होने के बावजूद राजकोष का एक भी पैसा अपने व अपने परिवार पर नहीं खर्च करते थे। वह खजूर के पत्तों से बने पंखों को बेचकर धन जुटाते थे। स्वयं की माली हालत ठीक न होने की वजह से वह अपनी सात पुत्रियों के विवाह को लेकर चिंतित रहते थे। पिता को चिंतित देख सातों बहनों फूलमती देवी, क्षेमकली देवी, सिंहवाहिनी, मौरारी देवी, गोवर्धनी देवी, शीतला देवी और तपेश्वरी देवी ने वैराग्य धारण कर अलग-अलग स्थानों पर चली गईं। आज उन्हीं स्थानों पर भव्य मंदिर बने है, जो कि सिद्धपीठ कहलाते हैं। इन सिद्धपीठों में एक माता फूलमती देवी का भव्य मंदिर है। मंदिर पहुंचने का रास्ता कन्नौज रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड से चार किलोमीटर तथा कन्नौज सिटी स्टेशन से महज डेढ़ किमी की दूरी पर यह मंदिर स्थित है। यहां से टेंपो सुविधा उपलब्ध है जो मंदिर तक पहुंचाती है। मंदिर के पास ही सेठ वासुदेव सहाय इंटर कालेज व विनोद दीक्षित अस्पताल प्रसिद्ध स्थान हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष शिखर मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि सिद्धपीठ माँ फूलमती देवी मंदिर की विशेष मान्यता है। नवरात्र के सभी दिनों में मातारानी का फूलों से श्रृंगार किया जाता है। बाहर से आने वाले भक्तों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

सात बहने देवी बनकर बरसा रही है कन्नौज पर कृपा

कन्नौज इत्र नगरी में स्थित ऐतिहासिक सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर की महिमा अपरम्पार है। इनकी महिमा का गुणगान जिले में ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में है। कन्नौज में देवी मंदिरों में सिद्धपीठ माता के सात रूप विराजमान है। इन सात रूपों की पूजा सात मंदिरों में स्थापित फूलमती देवी, क्षेमकली देवी, सिंहवाहिनी, मौरारी देवी, गोवर्धनी देवी, शीतला देवी और तपेश्वरी देवी में होती है। इतिहास यह है कि यह सातों देवी सात बहनें है। जो कन्नौज के महाराजा वेणुचक्र की कन्याएं हैं। इन सातों देवियों की असीम कृपा इस इत्र नगरी कन्नौज पर बरस रही है। जिस कारण इत्र नगरी कन्नौज आज भी देश–विदेशों में विख्यात है। आइये जानते है। सिद्धपीठ माँ फूलमती देवी मंदिर के इतिहास की यह कहानी कन्नौज के महाराजा वेणुचक्र की सात पुत्रियों में से एक है।

About The Author

Leave a Reply

Discover more from ROCKET POST LIVE

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading