Diabetes Testing Device: नहीं चुभानी पड़ेगी सुई, अब आंखो की पुतली से चेक होगी डायबिटीज
Diabetes Testing Device: डायबिटीज की जांच के लिए खून निकालने की जरूरत जल्द खत्म हो सकती है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के डॉक्टरों ने एक ऐसी डिवाइस विकसित की है, जो आंख की पुतली और झिल्लियों की तस्वीर लेकर डायबिटीज का सटीक स्तर बता सकती है। यह डिवाइस न केवल आसान और दर्द-रहित है, बल्कि परंपरागत तरीकों से ज्यादा सटीक भी है।
कैसे काम करती है यह डिवाइस?
एएमयू के राजीव गांधी मधुमेह और एंडोक्राइनोलॉजी केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हामिद अशरफ और कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. नदीम अख्तर ने इस डिवाइस को विकसित किया है। यह डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक पर काम करती है।
प्रक्रिया:
- आंख की पुतली और झिल्लियों की तस्वीर ली जाती है।
- इस तस्वीर को AI आधारित लर्निंग मशीन में डाला जाता है, जो डायबिटीज के स्तर की पहचान करती है।
- डिवाइस की मदद से 1 मिनट में रिपोर्ट मिल जाती है।
डिवाइस की लागत:
- इस डिवाइस के कैमरे की कीमत करीब 4,000 रुपये है, जो इसे सस्ती और आसानी से उपलब्ध बनाता है।
डिवाइस की सटीकता और फायदे
- सटीकता:
पैथोलॉजी लैब में जहां डायबिटीज जांच की शुद्धता 70-80% होती है, वहीं यह डिवाइस 90-95% तक सटीक रिपोर्ट देती है। - समय की बचत:
डिवाइस केवल 1 मिनट में परिणाम देती है, जबकि लैब टेस्ट में 10-15 मिनट लगते हैं। - पैसे की बचत:
परंपरागत जांच के मुकाबले यह तकनीक ज्यादा किफायती साबित हो सकती है।
शोध के परिणाम:
डिवाइस का परीक्षण 1,000 मरीजों पर किया गया, जिनमें 500 स्वस्थ और 500 डायबिटीज से ग्रस्त थे। डिवाइस ने इन दोनों श्रेणियों में सही परिणाम दिए।
- जिन्हें डायबिटीज नहीं थी, उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई।
- जिन्हें डायबिटीज थी, उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव रही।
नवाचार को पेटेंट कराने की तैयारी
डॉ. हामिद अशरफ और उनकी टीम अपने इस नवाचार को पेटेंट कराने की प्रक्रिया में है। उनका दावा है कि यह तकनीक डायबिटीज जांच के पारंपरिक तरीकों से अधिक विश्वसनीय होगी।
डॉ. हामिद अशरफ को सम्मानित किया गया
इस डिवाइस के विकास के लिए केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने डॉ. अशरफ को सम्मानित किया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक बड़े पैमाने पर लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
क्या कहता है भविष्य?
यह डिवाइस डायबिटीज जांच को सरल, दर्दरहित और सटीक बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। अगर इसे व्यापक रूप से उपयोग में लाया गया, तो यह तकनीक न केवल मरीजों का समय बचाएगी, बल्कि सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी।