दो पुलिसकर्मियों समेत हल्का लेखपाल निलंबित, बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप
दो पुलिसकर्मियों समेत हल्का लेखपाल निलंबित, जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर थाने में कोर्ट मामले में वादी को धमकाकर वसूली करने वाले दो सिपाही और लेखपाल को एसपी डॉक्टर कौस्तुभ ने निलंबित किया। हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर भी दर्ज।
एसपी जौनपुर डॉक्टर कौस्तुभ की बड़ी कार्रवाई से थर्राया पुलिस महकमा, दो सिपाही और हल्का लेखपाल निलंबित – हाईकोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया सख्त कदम
दो पुलिसकर्मियों समेत हल्का लेखपाल निलंबित, मुंगराबादशाहपुर थाने का मामला | पीड़ित को धमका कर वसूले गए दो हजार रुपये | हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई
गरियावां गांव की घटना से पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
जौनपुर जनपद के मुंगराबादशाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गरियावां गांव में घटित एक गंभीर मामले ने पूरे जिले की पुलिस व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस पूरे प्रकरण में न्याय के लिए संघर्ष कर रहे एक पीड़ित व्यक्ति को पहले धमकी दी गई, फिर थाने लाकर दो हजार रुपये लेकर छोड़ा गया। यह सबकुछ उस वक्त सामने आया जब पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दो पुलिसकर्मियों समेत हल्का लेखपाल निलंबित, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, एसपी जौनपुर को किया था तलब
इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एसपी जौनपुर डॉक्टर कौस्तुभ को तलब किया था। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद पुलिस विभाग में जवाबदेही का दौर शुरू हुआ और एसपी डॉक्टर कौस्तुभ ने कड़ा निर्णय लेते हुए संबंधित दोषियों पर कार्यवाही का डंडा चलाया।
दो कांस्टेबल और हल्का लेखपाल निलंबित, एफआईआर दर्ज
पुलिस अधीक्षक जौनपुर डॉक्टर कौस्तुभ ने इस पूरे मामले में मुंगराबादशाहपुर थाने में तैनात सिपाही पंकज मौर्य और नीतीश कुमार गोंड के साथ-साथ हल्का लेखपाल विजय शंकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यही नहीं, तीनों के खिलाफ विधिवत एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है।
दो पुलिसकर्मियों समेत हल्का लेखपाल निलंबित: आरोप गंभीर -पीड़ित को धमकाकर मुकदमे से नाम हटवाने का दबाव, फिर की वसूली
जानकारी के अनुसार, उक्त सिपाहियों और लेखपाल पर यह आरोप है कि इन्होंने कोर्ट में चल रहे एक मुकदमे में वादी को धमकाया, उसका नाम मुकदमे से हटवाने का प्रयास किया, फिर उसे घर से थाने ले जाकर दो हजार रुपये की अवैध वसूली की। इस कृत्य के बाद जब पीड़ित ने न्याय की उम्मीद में हाईकोर्ट का रुख किया, तो न्यायालय ने न केवल मामले की गंभीरता को समझा, बल्कि सीधे एसपी को तलब कर दिया।
सीयूजी नंबरों पर अफसरों की चुप्पी, सिर्फ एसपी ने दिखाया जवाबदेही का जज्बा
इस प्रकरण में एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि जब पत्रकारों और आमजन ने उच्च अधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास किया, तो एसपी सिटी, एसपी ग्रामीण, सीओ मछलीशहर समेत अधिकांश पुलिस अधिकारियों के सीयूजी नंबर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। सिर्फ और सिर्फ एसपी डॉक्टर कौस्तुभ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी और जवाबदेही का उदाहरण पेश किया।
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पुलिस विभाग में हड़कंप, अधिकारी और कर्मचारी सतर्क
एसपी की इस कड़ी कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में स्पष्ट संदेश गया है कि लापरवाही, भ्रष्टाचार और जनता को डराने वाली मानसिकता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई से जिले के पुलिसकर्मियों में खलबली मच गई है और अब हर थाना और चौकी में मातहत कर्मियों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
जनता को मिला विश्वास, प्रशासन की जवाबदेही पर फिर से उठी उम्मीद
इस प्रकरण के बाद एक बात और स्पष्ट हो गई है – यदि कोई व्यक्ति अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाए, तो न्याय की राह अब बंद नहीं है। एसपी डॉक्टर कौस्तुभ की यह कार्यवाही जौनपुर पुलिस की साख को फिर से बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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