कानपुर में है दशानन रावण का मंदिर – पट खुलते ही विधि विधान से हुई पूजा अर्चना
रिपोर्ट – शिवा शर्मा – कानपुर नगर
अधर्म पर धर्म की और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक रावण का व्यक्तित्व शायद ऐसा ही है कि हम सरेआम रावण को दोषी मानते है और उसका पुतला तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जलाते है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि रावण का यही व्यक्तित्व उसकी पूजा भी कराता है। क्योंकि पूरे देश में विजयदशमी में रावण का प्रतीक रूप में वध कर के उसका पुतला जलाया जाता हो। लेकिन आज हम ले चलेंगे उत्तर प्रदेश के कानपुर की एक ऐसी जगह है जहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं यहां पूजा करने के लिए रावण का मंदिर भी मौजूद है, जो केवल वर्ष में दशहरे के दिन ही खोला जाता है।
जानिए कहां है रावण का मंदिर
रावण का ये मंदिर उद्योग नगरी कानपुर के शिवाला में मौजूद है। विजयदशमी के दिन इस मंदिर में पूरे विधि विधान से रावण का दुग्ध स्नान और अभिषेक के साथ श्रृंगार किया जाता है। उसके बाद पूजन के साथ रावण की स्तुति और आरती भी की जाती है। इस मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। ख़ास बात यह है कि पूजा अर्चना मंदिर को फिर से बंद कर दिया जाता है। वह भी पूरे एक साल के लिए। यानी दशहरा के दिन ही दुबारा इस मंदिर के पट फिर से खोले जाएंगे।
क्यों की जाती है रावण की पूजा
ब्रह्म बाण नाभि में लगने के बाद और रावण के धराशायी होने के बीच कालचक्र ने जो रचना की उसने रावण को पूजने योग्य बना दिया। यह वह समय था जब राम ने लक्ष्मण से कहा था कि रावण के पैरो की तरफ खड़े होकर सम्मान पूर्वक नीति ज्ञान की शिक्षा ग्रहण करो। क्योकि धरातल पर न कभी रावण के जैसा कोई ज्ञानी पैदा हुआ है और न कभी होगा। रावण का यही स्वरूप पूजनीय है और इसी स्वरूप को ध्यान में रखकर कानपुर में रावण के पूजन का विधान चलता चला आ रहा है।
जानिए कानपुर में कब बना रावण का मंदिर
सन 1868 में कानपुर में बने इस मंदिर में तबसे आज तक निरंतर रावण की पूजा होती है। लोग हर वर्ष इस मंदिर के खुलने का इन्तजार करते है और मंदिर खुलने पर यहां पूजा अर्चना बड़े धूमधाम से करते है। पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना के साथ रावण की आरती भी की जाती है। कानपुर में मौजूद रावण के इस मंदिर के बारे में यह भी मान्यता है कि यहाँ मन्नत मांगने से लोगों के मन की मुरादें भी पूरी होती है और लोग इसी लिए यहाँ दशहरे पर रावण की विशेष पूजा करते चले आ रहे हैं। यहाँ दशहरे के दिन ही रावण का जन्मदिन भी मनाया जाता है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि रावण को जिस दिन राम के हाथों मोक्ष मिला उसी दिन रावण पैदा भी हुआ था।