UP में बाढ़ से तबाही: 17 ज़िले डूबे, 12 की मौत! जानिए पीलीभीत से प्रयागराज तक कैसे कोहराम मच गया

0
UP में बाढ़ से तबाही: 17 ज़िले जलमग्न, 12 की मौत, सैकड़ों गांव प्रभावित। जानिए प्रयागराज, पीलीभीत, बांदा, बलिया और अन्य जिलों का हाल।

UP में बाढ़ से तबाही: 17 ज़िले जलमग्न, 12 की मौत, सैकड़ों गांव प्रभावित। जानिए प्रयागराज, पीलीभीत, बांदा, बलिया और अन्य जिलों का हाल।

कुदरत का रौद्र रूप’ – जब उत्तर प्रदेश की धरती पर आई विनाश की लहर!

जब आसमान से बरसी बारिश नहीं, तबाही बरसी – उत्तर प्रदेश में जल प्रलय का तांडव!

उत्तर प्रदेश इस समय एक भयानक प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा है, जहां आसमान से आई बारिश ने राहत की बजाय तबाही की कहानी लिखी है। प्रदेश के 17 ज़िले पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, और अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है। गांव दर गांव जलमग्न हो चुके हैं, सड़कों पर नावें चल रही हैं, और खेतों में खड़ी फसलें बर्बादी के आंसू रो रही हैं।

गंगा, यमुना, घाघरा, शारदा और केन जैसी प्रमुख नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और इनकी बेकाबू लहरों ने हर ओर तबाही मचा दी है। जिन इलाकों में कभी सूखा बड़ी समस्या थी, आज वहां के लोग अपने घरों और जान की सलामती के लिए पलायन कर रहे हैं।

यह कोई एक जिले की त्रासदी नहीं, बल्कि एक राज्यव्यापी आपदा है – जिसमें प्रयागराज से लेकर पीलीभीत तक, बलिया से लेकर बांदा तक, रायबरेली से लेकर चंदौली और सीतापुर तक हर जिला जल संकट की मार झेल रहा है। किसी जगह लोग अपने बच्चों को कंधे पर उठाकर पानी में चल रहे हैं, तो कहीं वृद्ध दंपत्तियों को नाव से बचाया जा रहा है।

प्रशासनिक दावों और वास्तविक हालातों के बीच जमीन-आसमान का फर्क दिखाई दे रहा है। जमीनी हकीकत ये है कि कहीं नावें नहीं हैं, और जहां हैं वहां सिर्फ एक लाइफ जैकेट है। गांवों में लोग अपनी आंखों के सामने अपने घरों को बहते हुए देख रहे हैं और राहत की आस में केवल नेताओं और अधिकारियों की झलक पकड़ने को मजबूर हैं।

यह सिर्फ बाढ़ नहीं है, यह राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली की असल परीक्षा है। एक ऐसी परीक्षा जिसमें जनता डूबी हुई है और जवाबदेही किनारे पर खड़ी तमाशा देख रही है।

इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको ले चलेंगे पीलीभीत से लेकर प्रयागराज तक के हर जिले की जमीनी हकीकत पर – जहां पानी ने घर छीने, ज़मीन लील ली और व्यवस्था को पूरी तरह नंगा कर दिया।

प्रयागराज: संगम नगरी में ‘जलप्रलय’, नावों में बच्चों को उठाए दौड़ते माता-पिता

संगम नगरी प्रयागराज में हालात इतने भयावह हैं कि सड़कें अब नदी बन चुकी हैं। नावों में नवजात शिशुओं को लेकर भागते माता-पिता की तस्वीरें दिल को झकझोर देती हैं। अब तक पूरे जिले में 402 गांव जलमग्न हो चुके हैं, यूपी में 12 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग राहत शिविरों की ओर पलायन कर चुके हैं।

बांदा: यमुना और केन ने तोड़े सब बांध, प्रशासनिक ‘जुगाड़ू नावों’ में जान का सफर

बुंदेलखंड का बांदा ज़िला, जो आमतौर पर सूखा झेलता है, इस बार जलसंकट नहीं, बल्कि जलप्रलय झेल रहा है। पैलानी तहसील के दर्जनों गांवों में पानी घरों के अंदर घुस चुका है। नांदादेव, शंकरपुरवा और पडोरा गांव जैसे इलाकों में लोग पलायन करने पर मजबूर हैं। दुखद स्थिति ये है कि प्रशासन की ओर से सिर्फ जुगाड़ू नावें चलाई जा रही हैं, जिनमें 20 लोग एक साथ सामान, बाइक और बच्चों के साथ सफर कर रहे हैं – और वह भी सिर्फ एक लाइफ जैकेट के सहारे

ग्रामीणों का सवाल: अगर नाव डूब गई, तो नाविक अपनी जान बचाएगा या 20 लोगों की?

 ग्रामीण – “हमारे लिए तो ये नाव मौत की सवारी बन गई है… प्रशासन बस दिखावा कर रहा है।”

बलिया: जहां गंगा काट रही है ज़मीन और उजड़ रहे हैं आशियाने

बैरिया तहसील के चक्की नौरंगा गांव में गंगा नदी ने उपजाऊ ज़मीन और घरों को निगलना शुरू कर दिया है। कटान से परेशान ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्राली में घर का सामान लादकर बंधे पर शरण ले रहे हैं। दुख की बात ये है कि ना कोई जनप्रतिनिधि आया, ना ही समय रहते राहत पहुंची

रवींद्र पांडेय, कटान पीड़ित: “हम अपनी आंखों के सामने अपने घर बर्बाद होते देख रहे हैं, और कोई सुनने वाला नहीं।”

विनोद राम, कटान पीड़ित: “अब गांव नहीं बचेगा, हम सभी को जाना पड़ेगा…”

 चंदौली: पानी की रफ्तार से कांप उठा प्रशासन

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के रतनपुर और बहादुरपुर गांव पूरी तरह से गंगा की चपेट में आ चुके हैं। जैसे ही पानी गांव में घुसा, तहसील प्रशासन और भाजपा विधायक रमेश जायसवाल स्टीमर से मौके पर पहुंचे। कई इलाकों में प्रशासनिक चौकियां तो हैं, लेकिन लोगों तक पहुंचने में देरी हो रही है

ग्रामीणों का दर्द: “बाढ़ तो हर साल आती है, पर तैयारी हर साल नदारद होती है…”

सीतापुर: शारदा और घाघरा का कहर, खेतों के बाद अब बस्तियां खतरे में

लहरपुर और बिसवा तहसील के गांवों में नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। अब तक सैकड़ों बीघा खेती बर्बाद हो चुकी है और कई गांव खतरे की जद में हैं। प्रशासन ने अभी तक कोई राहत नहीं पहुंचाई है, जिससे ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है।

रायबरेली: सड़कों पर नाव बैठकर किया विरोध प्रदर्शन

बरसात के बाद नगर पंचायत की लापरवाही लोगों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने नाव में बैठकर सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया और कहा – “अगर समय रहते नालियां साफ होतीं, तो ये दिन नहीं देखना पड़ता।”

मिर्जापुर: बाढ़ में फंसे बुजुर्ग को मंत्री के आदेश पर बचाया गया

कोन ब्लॉक के धरहरा गांव में बाढ़ में फंसे बुजुर्ग दंपति की गुहार कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल तक पहुंची। उनके निर्देश पर SDM गुलाब चंद्र और CO अमर बहादुर ने मोटरबोट से दंपति को रेस्क्यू किया और राहत शिविर में पहुंचाया।

पीलीभीत: जानिए  की स्थिति

हालांकि पीलीभीत में स्थिति अभी प्रयागराज और बांदा जैसी भयावह नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और शारदा नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण बन रहा है। पलिया, बरखेड़ा और बीसलपुर जैसे क्षेत्रों में खेतों में जलभराव शुरू हो चुका है और प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। ग्रामीणों से निचले इलाकों से निकलने की अपील की जा रही है, जबकि सुरक्षा के लिए SDRF को तैनात किया गया है

आंकड़ों में बाढ़ की तबाही:

जिला प्रभावित गांव स्थिति
प्रयागराज 402+ 12 मौतें, नाव से रेस्क्यू
बांदा दर्जनों जुगाड़ू नाव, पलायन शुरू
बलिया 6+ गंगा कटान से उजड़ा गांव
चंदौली 10+ विधायक पहुंचे मौके पर
रायबरेली सड़क पर नाव से विरोध
मिर्जापुर 2 बुजुर्ग दंपत्ति रेस्क्यू
सीतापुर 12+ कटान से तबाही
पीलीभीत 6+ अलर्ट, SDRF तैनात

उत्तर प्रदेश की धरती इस समय भीषण जल संकट से जूझ रही है। प्रशासनिक तैयारियों की पोल बाढ़ ने खोल दी है। कहीं नावें नहीं हैं, कहीं नावें हैं तो लाइफ जैकेट नहीं। लोग अपने बच्चों को कंधों पर उठाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं।

Ambedkar Nagar: करोड़ों की चोरी, चोर ले उड़े लाकर-नकदी और CCTV

About The Author

Leave a Reply

Discover more from ROCKET POST LIVE

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading