सपा समर्थन में उतरे,सोशल मीडिया पर बोले,पुलिस ने ‘रेल’ दिया!
सपा समर्थन में उतरे: तालिब पठान की पोस्ट पर मचा बवाल, पुलिस ने उठाया सख्त कदम, परिवार ने खुद बेटे की मंशा पर उठाए सवाल। जानिए पूरा मामला।
“जो ‘अखिलेश भैया’ का सामना करेगा, उसे रेल दिया जाएगा!” — शाहजहांपुर में सपा समर्थक का बयान बना पुलिसिया आफत
शाहजहांपुर के अल्लाहगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला तालिब पठान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का जबरदस्त समर्थक है। लेकिन सोशल मीडिया पर उसका जोश ही उसकी मुसीबत बन गया। तालिब ने फेसबुक पर लिखा—
“अखिलेश भैया का जो सामना करेगा उसे रेल दिया जाएगा।”
यह वाक्य भले ही समर्थक के मन की “राजनीतिक कविता” थी, लेकिन पुलिस ने इसे “धमकी और भड़काऊ भाषा” मानते हुए सीधे 151 की धारा में चालान कर दिया। मतलब— राजनीति में भले सपने देखो, लेकिन शब्दों की स्पीड अगर ज़्यादा हो गई तो पुलिस ‘ब्रेक’ नहीं, ‘रेल’ दे देती है।
सपा समर्थन में उतरे, अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिब की व्यथा, और अध्यक्ष की मुस्कान!
समाजवादी पार्टी कार्यालय में जब अखिलेश यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तभी तालिब पहुंचा और खुद को ‘शिकार’ बताते हुए पूरा मामला उनके सामने रख दिया।
तालिब की बात सुनते ही अखिलेश यादव भी हँसी नहीं रोक पाए। हाँ, उन्होंने संवेदनशीलता के साथ मामला सुना लेकिन जिस अंदाज़ में तालिब ने शिकायत रखी— वो सोशल मीडिया का मसाला बन गया।
सपा समर्थन में उतरे, सच्चाई क्या है? पिता बोले— “लड़का नकारा है, राजनीति में बर्बाद हो गया!”
तालिब की शिकायत के जवाब में उसके पिता खुद मीडिया के सामने आए। उन्होंने साफ कहा—
“मेरा बेटा नकारा है। पढ़ाई तो कर ली लेकिन कोई काम नहीं करता। अब सोशल मीडिया और फर्जी राजनीति के चक्कर में फंस गया है। पुलिस ने कोई पैसा नहीं लिया, उल्टा ये अफवाह फैला रहा है।“
उन्होंने शरदवीर सिंह और भाजपा नेताओं को मामले से पूर्णत: अलग बताया।
सपा समर्थन में उतरे, राजनीति या पब्लिसिटी स्टंट?
इस पूरी घटना में एक ओर सोशल मीडिया पर तालिब जैसे समर्थकों की “भावनात्मक पोस्ट” है, जो हद पार कर जाती है। दूसरी ओर पुलिस की कड़ी कार्रवाई है, जो “राजनीतिक बयानों” को भी अपराध की श्रेणी में रखने लगी है।
लेकिन बीच में एक युवा का भविष्य है, जो खुद को ‘सिस्टम का शिकार’ कहता है और परिवार उसे ‘भटका हुआ’।
स्थानीय नेताओं का बयान और कटाक्ष
पूर्व विधायक शरदवीर सिंह ने मामले से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि तालिब जैसे युवाओं को “गाइडेंस की ज़रूरत है, न कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की”।
वहीं छोटे लल्ला उर्फ़ तौफ़ीक शाहजहाँपुरी का बयान सामने आया जिसमें उन्होंने कहा—
“राजनीति में जोश ठीक है, लेकिन होश के बिना जो बोलेगा, वो खुद रेल जाएगा।“
जनता के लिए जनचेतावनी:
सोशल मीडिया पर हर पोस्ट ‘वायरल’ नहीं, ‘दायर’ भी हो सकती है!
जोश में आकर नेताओं के नाम पर भड़काऊ या डरावनी भाषा का इस्तेमाल आपकी नौकरी, शिक्षा और भविष्य तीनों को पटरी से उतार सकता है।
तालिब पठान का मामला सिर्फ एक युवक की शिकायत नहीं, बल्कि सोशल मीडिया युग की नई राजनीति का आईना है— जहाँ नेता की भक्ति में कुछ लोग इतनी दूर चले जाते हैं कि कानून की सरहदों को लांघ बैठते हैं।
समाजवादी पार्टी हो या कोई और दल— समर्थकों को यह समझना होगा कि नेता को सपोर्ट करना अलग बात है, लेकिन “धमकी देना” सपोर्ट नहीं, अपराध है।
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