सरकारी नौकरी लगने के बाद अक्सर लोगों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। हालांकि, मध्यप्रदेश के सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस इस धारणा को तोड़ते हुए सादगी की मिसाल पेश कर रहे हैं। वह रोज़ाना बिना तामझाम के साइकिल से दफ्तर आते-जाते हैं और यही उनकी लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह है।
बचपन से था आईएएस बनने का सपना
डॉ. सतीश कुमार एस, जो तमिलनाडु के मूल निवासी हैं, जिन्होंने लागर और कड़ी मेहनत से पढाई करने के बाद 28 जनवरी 2025 को सतना के कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाला। बचपन से ही उनका सपना कलेक्टर बनने का था, जिसे उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से पूरा किया।
लापरवाही के खिलाफ रहता है सख्त रुख
अपने कार्य के प्रति ईमानदारी और सख्ती के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. सतीश कुमार एस लापरवाह अधिकारियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते। उदाहरण के लिए, एक जनसुनवाई के दौरान उन्होंने लापरवाही बरतने वाले हेडमास्टर को तुरंत निलंबित कर दिया।
जनता और अधिकारियों में लोकप्रिय
डॉ. सतीश कुमार एस का पालन-पोषण एक अनुशासित और सेवा भावी परिवार में हुआ। उनकी मां शिक्षिका और पिता पटवारी थे। यही कारण है कि उनमें बचपन से ही शिक्षा और सेवा दोनों के प्रति गहरी रुचि रही। आज वे अपनी सादगी और कड़े निर्णयों के कारण जनता और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।
समाज के प्रति रहती है सक्रियता
इसके अलावा, उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी पर भी अंकुश लगाया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आई है। इस तरह वे न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सादगी और ईमानदारी के प्रतीक डॉ. सतीश कुमार एस आज युवाओं और अधिकारियों दोनों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
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