UP News: 46 साल बाद खुलेगी संभल दंगों की फाइल, CM ने कहा – ‘मारे गए थे 209 हिन्दू’.. अब..
UP News: संभल में 46 साल पहले हुए दंगों को लेकर अब एक बार फिर जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मुरादाबाद के कमिश्नर आन्जनेय सिंह ने संभल दंगे के पुराने रिकॉर्ड को तलब किया है। इस फैसले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि 1947 से लेकर अब तक संभल में दंगों में 209 हिंदू मारे गए हैं।
संभल दंगे की संक्षिप्त जानकारी
जानकारी के अनुसार, 29 मार्च 1978 को संभल में एक बड़ा दंगा हुआ था, जिसमें लगभग 200 हिंदुओं की जान गई। हालांकि रिकार्ड पर यह संख्या 184 बताई गई है। इस दंगे के बाद संभल के दीपा सराय इलाके से हिंदू परिवार पलायन करने को मजबूर हो गए थे। इस घटना के बाद से संभल की आबादी का अनुपात काफी बदल गया, और आज हिंदू वहां अल्पसंख्यक हो गए हैं। स्वतंत्रता संग्राम के समय जहां संभल में हिंदू आबादी आधे से अधिक थी, वहीं आज यह आंकड़ा मुश्किल से 15 फीसदी रह गया है।
मुख्यमंत्री का बयान और प्रशासन की सक्रियता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में विधानसभा में इस मुद्दे पर बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि 1978 के दंगे में हिंदू समुदाय के 209 लोग मारे गए थे। मुख्यमंत्री के बयान के बाद संभल और मुरादाबाद के अधिकारियों ने इस मामले को फिर से खंगालने की प्रक्रिया शुरू की है। 46 साल पहले हुए इस दंगे में करीब 169 एफआईआर दर्ज की गई थीं, लेकिन अब तक किसी को भी सजा नहीं मिली।
दंगे का कारण और अफवाहों का प्रभाव
संभल दंगे की जड़ में एक अफवाह थी। 1978 में मुस्लिम लीग के नेता मंजर शफी ने एसडीएम से मुलाकात के दौरान अपमानित होने के बाद हिंसा का माहौल पैदा किया। उन्होंने हिंदू व्यापारियों से झगड़ा किया और बाद में अफवाह फैलाई कि मंजर शफी की मौत हो गई है। इसके बाद दीपा सराय में हिंदू परिवारों की हत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया। इससे पहले 1976 में मस्जिद के इमाम की हत्या के बाद भी संभल में तनाव था, लेकिन 1978 में हुए इस दंगे ने पूरी स्थिति को और खराब कर दिया।
कर्फ्यू और ताबड़तोड़ हिंसा
इस दंगे के बाद संभल में दो महीने तक कर्फ्यू लगा रहा था। इस दौरान शहर में दोनों समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही और प्रशासन ने कई बार स्थिति को काबू में करने के लिए कड़ी कार्रवाई की। इस दौरान मंदिरों को भी तोड़ा गया और कई हिंदू परिवार पलायन कर गए। इन घटनाओं ने शहर के सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने को स्थायी रूप से प्रभावित किया।
प्रशासन की जांच और कार्रवाई
अब, 46 साल बाद प्रशासन ने फिर से इस मामले की जांच शुरू कर दी है। कमिश्नर आन्जनेय सिंह ने कहा है कि यह रूटीन प्रक्रिया है, और उन्होंने पुराने मामलों की समीक्षा की है। हालांकि, इस बार अधिकारियों को यह जानने की कोशिश है कि आखिर क्यों इस दंगे के बाद कोई दोषी नहीं पकड़ा गया। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि जांच में किस स्तर पर चूक हुई।
नए सबूत और दस्तावेजों की तलाश
अधिकारियों ने अब 1978 के दंगे से संबंधित दस्तावेजों की तलाश शुरू कर दी है। इस दौरान उन मामलों की पुनः समीक्षा की जा रही है, जिन्हें पहले से बंद कर दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि वे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इतनी बड़ी हिंसा के बावजूद किसी को सजा क्यों नहीं मिल सकी।
निष्कर्ष
संभल के दंगे, जो 46 साल पहले हुए थे, अब एक बार फिर चर्चा में हैं। प्रशासन इस समय उन पुराने मामलों की जांच कर रहा है, जो या तो अनसुलझे रह गए थे या फिर भूल-चूक की वजह से ठंडे बस्ते में चले गए थे। इस जांच का उद्देश्य उन कारणों का पता लगाना है, जिन्होंने दंगे की भयावहता को बढ़ाया और यह सुनिश्चित करना कि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों।