एक्शन में रहता है घाटमपुर का रावण – देखिए और पढ़िए एक नजर
रिपोर्ट – मनीष भटनागर – कानपुर नगर
Kanpur News – वैसे तो दशहरा के पर्व पर रावण के पुतले को आग के हवाले करते हुए असत्य पर सत्य की जीत की परम्परा सम्पूर्ण भारत में मनाई जाती है लेकिन सबसे मुख्य और आकर्षक वाली बात देखी जाती है तो वो रावण के अलग-अलग बने हुए पुतलों की। जिनकी बनावट में कोई न कोई ऐसी खासियत रखी जाती है कि वो दर्शकों के लिए बेहद सटीक मनोरंजन का साधन बन कर रह जाता है। कुछ ऐसा ही अनोखा है कानपुर के घाटमपुर में बन रहा रावण का विशालकाय पुतला। जो यहां के कपड़े पहनता ही नहीं है। बल्कि उसे सूरत के कपड़ों से सुन्दर बनाया जाता है।
बात पुरानी है
जब घाटमपुर तहसील क्षेत्र के पतारा कस्बा निवासी संजय सिंह ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से बुजुर्ग रावण का पुतला तैयार करते थे। जब वह छोटे थे तो बचपन में वह भी अपने दादा और पिता जी को रावण का पुतला बनाते देखते थे। समय रहते उनकी रूचि भी रावण के पुतले को तैयार करने में लगने लगी। वह बचपन में छोटा सा रावण का पुतला बनाया करते थे। समय बीता और दादा जी का देहांत हो गया। जिसके बाद से वह वह बड़े हुए और रावण का पुतला बनाने में अपने पिता जी की मदद करने लगे। लेकिन पिता जी का स्वर्गवास हो गया। जिसके बाद उन्होंने इस परंपरा को आगे बरक़रार रखा।
सूरत से मंगाया जाता कपड़ा
यहां के रावण की खासियत है कि उसके चेहरे को बनाने के लिए पहले बांस की लकड़ी को पानी में भिगोया जाता है। जिसे एक दिन बाद पानी से बाहर निकालकर चेहरे की आकृति बनाई जाती है। जिसके बाद उसके ऊपर साड़ी से सिलाई की जाती है और चेहरा समतल करने के लिए अखबार, तख्ती, फोम आदि का प्रयोग किया जाता है, जिसके बाद उसके ऊपर कलर पेंट लगाया जाता है। कलर सूखने के बाद चेहरे की आकृति बनकर तैयार हो जाती है। आंखों को बनाने के लिए सूरत से कपड़ा मंगाया जाता है। जिससे आंखों की पुतली बनाई जाती है।
एकता का प्रतीक है रावण का पुतला
वहीं इस संबंध में संजय सिंह बताते हैं कि रावण के पुतले को बनाने में हिंदू मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग सहयोग करते है, यहां पर रावण का मुकुट कस्बा निवासी कासिम के द्वारा तैयार किया जाता है, यह रावण का पुतला क्षेत्र में हिंदू मुस्लिम एकता को दर्शाता है। कासिम ने बताया की रावण के मुकुट को बनाने में लगभग 45 झालर लगती है। मुकुट को तैयार करने में कलर शीट, प्रिंटेड शीट आदि का प्रयोग किया जाता है। वह कई वर्षों से रावण के मुकुट को बनाने का काम कर रहे है।
ये है पुतला बनाने की कमेटी
संजय सिंह के अनुसार वह और उनके भाई सुधाकर सिंह रावण के पुतले को बनाते है। इसके साथ ही सहयोगी महिपाल सिंह, भोलू गुप्ता, सुमित गुप्ता, राजन शर्मा, शीलू सिंह, सुखवासी के साथ मिलकर रावण के 35 फीट ऊंचे पुतले को बनाते है। उन्होंने बताया कि रावण के पुतले को तैयार करने के लिए वह अपने सहयोगियों के साथ दिन रात लगते है। जिसके बाद यह पुतला बनकर तैयार होता है। रावण का पुतला बनाने में लगभग पचास हजार रुपए का खर्च आता है, जिसे वह लोग वाहन करते है।