कानपुर की रमईपुर ग्राम पंचायत की अनोखी पहल, जानिए कचरे से कैसे बढ़ा रहे अपनी कमाई

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कानपुर नगर की विधनू ब्लॉक स्थित रमईपुर ग्राम पंचायत अब केवल स्वच्छता के लिए ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता के एक नए मॉडल के लिए भी चर्चा का विषय बन गई है। यहां ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें कचरे का निपटान तो हो ही रहा है, साथ ही उससे कमाई भी की जा रही है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज–2 के अंतर्गत ग्राम पंचायत में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट और रिसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) की स्थापना की गई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने हाल ही में इन दोनों केंद्रों का निरीक्षण किया और कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

अभियान की हुई शुरुआत 

डीपीआरओ मनोज कुमार ने जानकारी दी कि पंचायत द्वारा लगभग 16 लाख रुपये की लागत से यूनिट का निर्माण और मशीनों की खरीद की गई। इसके बाद से प्लास्टिक और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से संचालित हो रही है। बीते कुछ महीनों में ही यूनिट पर 9.5 टन प्लास्टिक अपशिष्ट एकत्र किया गया। इसे बैलिंग और ट्रेडिंग की प्रक्रिया से गुजारकर स्थानीय कबाड़ियों और नेचर नेक्स्ट फाउंडेशन के माध्यम से बेचा जा रहा है। पंचायत को अब तक केवल प्लास्टिक से ही 6,000 रुपये की आय हो चुकी है।

इसके अलावा, कचरे से तैयार वर्मी कम्पोस्ट भी आय का मजबूत जरिया बन रहा है। पंचायत ने लगभग 2,000 किलो वर्मी कम्पोस्ट बेचकर 25,000 रुपये से अधिक की कमाई की है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि गांव की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ कर रहा है।

इस तरह बदल गया सब कुछ 

गांव की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। करीब 425 घरों से नियमित रूप से कचरा एकत्रित किया जा रहा है और सीधे RRC सेंटर पहुंचाया जाता है। लगभग 350 परिवार स्वेच्छा से 30 रुपये का मासिक यूजर चार्ज भी जमा कर रहे हैं। इस व्यवस्था से पंचायत के ओएसआर खाते में डेढ़ लाख रुपये से अधिक राशि संरक्षित हो चुकी है।

ग्रामीणों के अनुसार, पहले प्लास्टिक नालियों को जाम कर देता था जिससे गंदगी फैलती थी। अब यह समस्या लगभग समाप्त हो चुकी है। बच्चे साफ-सुथरे वातावरण में खेल पा रहे हैं और गांव की सूरत निखर रही है।

जिलाधिकारी न की तारीफ 

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस पहल को सराहनीय बताया और कहा कि रमईपुर का यह मॉडल अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। यह न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि पंचायतों की आमदनी भी बढ़ाएगा।

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