पीलीभीत DM को खून से लिखा पत्र!, पंचायत निधि भुगतान में भ्रष्टाचार का खुलासा
पूरनपुर में ग्राम निधि भुगतान को लेकर पूर्व प्रधान पुत्र नाबिर अली ने पीलीभीत DM को खून से लिखा पत्र! अधिकारियों के आदेश के बावजूद नहीं मिला भुगतान।
खून से लिखा गया इंसाफ का खत! बकाया भुगतान के लिए पूर्व प्रधान का बेटा पहुँचा डीएम के दरबार
पीलीभीत DM को खून से लिखा पत्र! ग्राम पंचायत अधिकारी पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद भी नहीं हुआ भुगतान
सिमरिया तालुका महाराजगंज, पूरनपुर, पीलीभीत से रिपोर्ट
रॉकेट पोस्ट लाइव टीम
पीलीभीत DM को खून से लिखा पत्र! जब इंसाफ की उम्मीद टूटती है, तो खून कलम बन जाता है!
पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिमरिया तालुका महाराजगंज से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे जनपद में तहलका मचा दिया है। यहां के पूर्व प्रधान के पुत्र नाबिर अली मंसूरी ने ग्राम पंचायत निधि से कराए गए कार्यों का बकाया भुगतान न मिलने से नाराज़ होकर, जिलाधिकारी को खून से पत्र लिख डाला।
खून से लिखी गई गुहार – ‘मुझे मेरा हक चाहिए!’
नाबिर अली मंसूरी का कहना है कि उन्होंने पिछली पंचवर्षीय योजना में ग्राम पंचायत निधि से विकास कार्य कराए थे, जिनका भुगतान आज तक लंबित है। कई बार उच्च अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई, तो थक-हारकर उन्होंने अपने ही खून से जिलाधिकारी को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने ग्राम पंचायत अधिकारी पर बकाया रोकने का आरोप लगाया।
पीलीभीत DM को खून से लिखा पत्र!, हाईलेवल आदेश के बावजूद नहीं हुआ भुगतान?
नाबिर अली ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले एसडीएम से लेकर खंड विकास अधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी तक अपनी बात रखी थी। जांच के बाद उच्च अधिकारियों ने बकाया भुगतान का आदेश दिया था, लेकिन ग्राम पंचायत अधिकारी ने आदेश की अनदेखी कर दी। सवाल उठता है कि जब आदेश हो चुका है, तो फिर किसके इशारे पर अटकाया गया भुगतान?
गांव में गूंजने लगी सवालों की आवाज़
गांव के लोगों का कहना है कि अगर एक पूर्व प्रधान का बेटा भी न्याय के लिए खून बहाने को मजबूर हो, तो फिर एक आम नागरिक की क्या बिसात? ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार, मनमानी और भुगतान में धांधली कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब बात डीएम को खून से खत लिखने तक पहुंच जाए, तो प्रशासन को सचेत हो जाना चाहिए।
क्या यही है पंचायत राज व्यवस्था का चेहरा?
ग्राम पंचायतें जिस मकसद से बनाई गई थीं—गांव का विकास, लोगों को रोज़गार और पारदर्शिता—वो आज सवालों के घेरे में हैं। यदि सरकार की योजनाएं माल सप्लायर और ठेकेदारों तक ही सीमित रह जाएं और उन्हें भी भुगतान के लिए खून बहाना पड़े, तो यह लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई की असफलता मानी जाएगी।
अब सवाल यह है…
क्या जिलाधिकारी इस पत्र को गंभीरता से लेंगे?
क्या ग्राम पंचायत अधिकारी पर होगी कोई कार्रवाई?
क्या बाकी बकाया मामलों की भी होगी जांच?
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