Noida Nikki Case से Amroha तक: अब पुलिस वाले ने पत्नी को जिन्दा जलाया, चौंकाने वाली क्राइम स्टोरी!
Noida Nikki Case से Amroha तक:निक्की से पारुल तक… जब “बेटियाँ” घर की चौखट पर ही जलायी जाने लगीं!
देश की आत्मा को झकझोर देने वाला सच
नोएडा का निक्की हत्याकांड अभी देश की यादों से मिटा भी नहीं था कि अमरोहा से एक और खून खौला देने वाली वारदात सामने आ गई। एक पुलिसकर्मी पति, जिसने कानून की रक्षा की शपथ ली थी, उसी ने परिवार संग मिलकर अपनी पत्नी को जिंदा जलाने का अमानवीय खेल खेल डाला। सवाल ये उठता है—जब समाज की “रक्षक” वर्दीधारी से भी महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं, तो आखिर महिलाएँ जाएँ तो जाएँ कहाँ?
Noida Nikki Case से Amroha तक: वर्दीधारी पति ने रच दिया खौफनाक खेल
अमरोहा जिले के डिडौली थाना क्षेत्र के गाँव नारंगपुर में मंगलवार सुबह एक विवाहित महिला पारुल को उसके ही पति हेड कांस्टेबल देवेंद्र ने अपने परिवार के साथ मिलकर आग के हवाले कर दिया।
पारुल, जो कि पेशे से जीएनएम नर्स थीं और इकौदा के ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र में तैनात थीं, आग की लपटों में तड़पती रही। मायके पक्ष को पड़ोसियों ने फोन पर घटना की जानकारी दी। जब माँ-भाई मौके पर पहुँचे तो पारुल लहूलुहान और झुलसी हुई हालत में तड़प रही थी। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर दिल्ली रेफर कर दिया गया। अभी भी उसका जीवन मौत से जंग लड़ रहा है।
Noida Nikki Case से Amroha तक:माँ की व्यथा और बच्चों की मासूमियत
पारुल की माँ अनीता ने बताया कि 13 साल पहले बेटी की शादी देवेंद्र से हुई थी। उनकी एक जुड़वाँ संतान—एक बेटा और एक बेटी है। माँ का कहना है कि उनकी बेटी का स्वभाव शांत और मिलनसार था। लेकिन पति और ससुराल पक्ष ने मिलकर उसकी खुशियों को राख में बदल दिया।
Noida Nikki Case से Amroha तक:पुलिस कार्रवाई, लेकिन आरोपी फरार
पारुल के भाई की तहरीर पर पति देवेंद्र, सास, देवर समेत कुल छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि वारदात के बाद सभी आरोपी फरार हैं। सवाल यही—क्या वर्दी की ताकत कानून से भी ऊपर है?
ग्रेटर नोएडा का निक्की हत्याकांड – दहेज, जलती रूह और टूटा सपना
दूसरी ओर, ग्रेटर नोएडा की निक्की भाटी हत्या आज भी समाज के माथे पर एक कलंक की तरह है। निक्की, जो कि एक नामी मेकओवर आर्टिस्ट थीं और सोशल मीडिया पर बड़ी पहचान बना चुकी थीं, को उसके ही पति और ससुराल वालों ने पेट्रोल डालकर जला दिया।
निक्की के पिता ने आरोप लगाया कि बेटी को लगातार दहेज की मांग—35 लाख रुपये और एक लग्ज़री कार—के लिए प्रताड़ित किया जाता रहा। वहीं दूसरी ओर पड़ोसियों का कहना है कि निक्की और पति के बीच अक्सर इंस्टाग्राम रील्स और पार्लर चलाने को लेकर झगड़े होते थे।
सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन नतीजा एक ही रहा—एक मासूम और महत्वाकांक्षी लड़की राख में बदल दी गई।
Noida Nikki Case से Amroha तक:समाज से टकराते सवाल
क्या बेटियों की ज़िंदगी अब “नकद” और “कार” में तौली जाएगी?
क्या सोशल मीडिया पर पहचान बनाना किसी महिला का गुनाह है?
जब वर्दीधारी पति ही अपनी पत्नी की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता, तब कानून पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा?
कब तक दहेज और पितृसत्ता की आग में महिलाएँ जलती रहेंगी?
अब बस! और कितनी निक्की, कितनी पारुल जलाईं जाएँगी?
नोएडा की निक्की और अमरोहा की पारुल—दोनों ही घटनाएँ इस देश की सड़ी हुई सोच और कानून के खोखलेपन की परतें खोलती हैं। फर्क बस इतना है कि एक घटना “सोशल मीडिया स्टार” से जुड़ी थी, तो दूसरी एक “सरकारी नर्स” से। लेकिन अंजाम दोनों का एक ही रहा—आग की लपटों में जलती औरत।
समाज को ये समझना होगा कि हर बेटी केवल परिवार की इज्ज़त नहीं, बल्कि देश की आत्मा है। अगर इसी तरह बेटियाँ चौखट पर जलायी जाती रहीं तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ़ नहीं करेगी।
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