UP News: विवाद! मुजफ्फरनगर में मस्जिद हुई शत्रु संपत्ति घोषित, पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री से जुड़े तार

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UP News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित एक मस्जिद को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है। यह मस्जिद और इसके साथ बनी चार दुकानें पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के परिवार की जमीन पर स्थित थीं। शिकायत के बाद हुई जांच और कानूनी प्रक्रिया के उपरांत इसे शत्रु संपत्ति के रूप में मान्यता दी गई।

शिकायत और जांच का सिलसिला

यह मामला राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन के संयोजक संजय अरोड़ा द्वारा 10 जून 2022 को तत्कालीन डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी को की गई शिकायत के बाद प्रकाश में आया। शिकायत में दावा किया गया था कि इस जमीन पर अवैध कब्जा कर मस्जिद और दुकानें बनाई गई हैं। जिला प्रशासन ने इस शिकायत की जांच के लिए एडीएम राजस्व गजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक समिति गठित की।

जांच रिपोर्ट को शत्रु संपत्ति कार्यालय, दिल्ली भेजा गया। भारत सरकार के शत्रु संपत्ति अभिकरण ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद इस संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया।

शत्रु संपत्ति क्या है?

शत्रु संपत्ति वह संपत्ति है, जो भारत के विभाजन के दौरान पाकिस्तान जाने वाले लोगों की थी। ऐसी संपत्तियों को भारतीय कानून के तहत सरकार की देखरेख में रखा जाता है। इस मामले में यह संपत्ति लियाकत अली खान और उनके परिवार से जुड़ी बताई गई।

पक्षकारों का दावा और तर्क

इस संपत्ति को लेकर पक्षकारों ने दावा किया कि यह वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उन्होंने 1937 के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि खसरा नंबर 930 पर स्थित इस जमीन का किराया वक्फ बोर्ड को दिया जा रहा था। उन्होंने इसे मस्जिद और वक्फ की संपत्ति बताया।

हालांकि, जांच के दौरान यह पाया गया कि यह संपत्ति शत्रु संपत्ति है और इस पर अवैध निर्माण किया गया था।

आगे की प्रक्रिया

सिटी मजिस्ट्रेट विकास कश्यप ने जानकारी दी कि इस संपत्ति पर चार दुकानें और एक बड़ी इमारत है। अब इसके पक्षकारों को नोटिस दिया जाएगा। यदि नोटिस के बाद इसे खाली नहीं किया गया, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।

 

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शिकायतकर्ता का बयान

राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन के संयोजक संजय अरोड़ा ने कहा, “यह हमारी लंबी लड़ाई का परिणाम है। डेढ़ साल से हम संघर्ष कर रहे थे। यह संपत्ति शत्रु संपत्ति थी, जिसे अवैध कब्जे के तहत मस्जिद और दुकानों में बदला गया था।” उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया और जल्द से जल्द संपत्ति को खाली कराने की मांग की।

विपक्षी पक्ष का पक्ष

इस संपत्ति पर दुकान चला रहे मोहम्मद अतहर ने इसे वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद आजादी से पहले की है और वक्फ एक्ट के तहत सुरक्षित है। अतहर ने यह भी कहा कि सरकार को इस मामले पर दोबारा विचार करना चाहिए, क्योंकि यह संपत्ति शत्रु संपत्ति नहीं है।

कानूनी और सामाजिक पहलू

यह मामला कानूनी और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। एक ओर, सरकार शत्रु संपत्ति के रूप में इसे जब्त करने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों और पक्षकारों के बीच इसे लेकर मतभेद बने हुए हैं।

निष्कर्ष

मुजफ्फरनगर की यह घटना न केवल कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं को दर्शाती है, बल्कि समाज में विभिन्न दृष्टिकोणों के बीच संतुलन की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। अब देखना होगा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।

रिपोर्ट -: आशीष कुमार, मुजफ्फरनगर

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