Muzaffarnagar से धर्म और आस्था की शानदार खबर, 1 लाख श्रद्धालु करेंगे पूजा

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Muzaffarnagar से धर्म और आस्था की शानदार खबर, 1 लाख श्रद्धालु करेंगे पूजा

Muzaffarnagar में 35 सालों से चल रही परंपरा, मिट्टी-गोबर से सजा 31 फीट ऊंचा गोवर्धन पर्वत — श्रद्धा और शिल्पकला का अद्भुत संगम”

मुजफ्फरनगर। गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर इस बार नई मंडी क्षेत्र के गौशाला मैदान में तैयार हुआ है आस्था और समर्पण का भव्य प्रतीक — 31 फीट ऊंचा गोवर्धन महाराज। ये सिर्फ गोबर और मिट्टी का ढांचा नहीं, बल्कि श्रद्धा, परंपरा और इंसानी मेहनत की अद्भुत मिसाल है। हर साल की तरह इस बार भी पंकज और उनकी टीम ने आठ दिनों की लगातार मेहनत के बाद इस विशाल गोवर्धन को आकार दिया है।

35 सालों से जीवित है यह परंपरा

पंकज पिछले 35 वर्षों से गोवर्धन पूजा की इस परंपरा को निभा रहे हैं। उनके लिए ये सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव और संस्कृति को जीवित रखने का मिशन बन चुका है। उनके साथ इस बार भी 7 से 8 कलाकारों की टीम ने दिन-रात मेहनत कर मिट्टी और गोबर से इस भव्य गोवर्धन पर्वत को तैयार किया।

1 ट्राली गोबर और 1 ट्राली मिट्टी से बना ‘गोवर्धन पर्वत’

इस गोवर्धन की विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से बनाया गया है — एक ट्राली गोबर और एक ट्राली मिट्टी से। इसे देखने के बाद हर कोई यही कह रहा है कि यह आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश भी देता है।

 लाखों श्रद्धालु करेंगे पूजा

आयोजकों के अनुसार, इस बार करीब 1 लाख श्रद्धालु गोवर्धन महाराज की पूजा-अर्चना करेंगे। गौशाला मैदान को दीपों और फूलों से सजाया गया है। पूजा के बाद गोवर्धन महाराज के चारों ओर परिक्रमा का विशेष आयोजन होगा। श्रद्धालु दूध, दही, फूल, और जल अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

गोवर्धन पूजा का संदेश,  प्रकृति के प्रति आभार

गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को शांत करने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया था, और तभी से हर साल गोवर्धन पूजा के दिन हम प्रकृति की रक्षा और गोसेवा के संकल्प को दोहराते हैं।

कला और भक्ति का संगम

नई मंडी क्षेत्र का यह गोवर्धन न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह एक लोककला का उत्कृष्ट उदाहरण भी है। मिट्टी की बनावट, गोबर की परतें और पारंपरिक आकृतियों की सजावट इसे जीवंत बनाती हैं। लोगों का कहना है कि “ऐसा गोवर्धन सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि कला और श्रद्धा की जीवंत प्रतिमा है।

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