मां, अगर मैं तेरी बात मान लेती, उस लव जिहादी का असली चेहरा पहचान लेती, तो इन 50 टुकड़ों में नहीं होती – Gorakhpur में पोस्टरों से हलचल
Gorakhpur में “I Love Yogi” से लेकर “लव जिहाद” तक—पंडाल के पोस्टरों ने मचाई हलचल, उठे सवाल और छिड़ी बहस
गोरखपुर। दीपों और भक्ति से सजे लक्ष्मी पूजा पंडाल इस बार सिर्फ श्रद्धा का नहीं, बल्कि संदेश और समाज के सरोकार का मंच भी बन गए। शहर के दिलेज़ाकपुर वार्ड नंबर 47 में आयोजित श्री श्री लक्ष्मी पूजा मित्र मंडल सेवा समिति के पंडाल में लगे पोस्टरों ने लोगों के बीच हलचल मचा दी है।
एक ओर माता लक्ष्मी की आराधना हो रही थी, तो दूसरी ओर दीवारों पर लगे पोस्टर समाज और राजनीति का आईना बन गए।
“I Love Yogi” से लेकर “लव जिहाद” तक – तीन पोस्टर, तीन संदेश
इस बार पंडाल में तीन अलग-अलग पोस्टर लगाए गए हैं, और हर पोस्टर ने अपनी अलग कहानी कही।
पहले पोस्टर में लिखा था — “I Love Yogi”, जिसके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर थी। यह पोस्टर सीधे-सीधे धार्मिक आस्था के साथ राजनीतिक समर्थन का संकेत देता दिखा।
दूसरे पोस्टर ने माहौल को और तीखा बना दिया। उस पर बड़े अक्षरों में लिखा था — “बटोगे तो कटोगे” और नीचे फिर वही— योगी आदित्यनाथ की तस्वीर। इस पोस्टर को लेकर लोगों में तरह-तरह की व्याख्याएं शुरू हो गईं—किसी ने इसे राजनीतिक चेतावनी बताया, तो किसी ने सामाजिक सन्देश का रूप माना।
लेकिन जो पोस्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, वह था तीसरा। उसमें लिखा था —
“मां, अगर मैं आपकी बात मान लेती, उस लव जिहाद का असली चेहरा पहचान लेती, तो इन 50 टुकड़ों में नहीं होती… आज अपने मां के साथ दीपावली में दिए जला रही होती।”
इस पोस्टर के नीचे नाम लिखा था — निवेदक: सुधांशु गुप्ता (विश्व हिंदू रक्षा परिषद)।
सुधांशु गुप्ता बोले — “लक्ष्मी पूजा सिर्फ धर्म नहीं, सामाजिक चेतना का पर्व है”
इस पूरे मामले में जब मीडिया ने विश्व हिंदू रक्षा परिषद के महानगर अध्यक्ष सुधांशु गुप्ता से बात की, तो उन्होंने स्पष्ट कहा —
“हमारे पोस्टरों का मकसद किसी को निशाना बनाना नहीं है। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि समाज सजग रहे।
लक्ष्मी पूजा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और संस्कृति की रक्षा का पर्व भी है।”
उन्होंने कहा कि आज समय की मांग है कि धर्म और संस्कृति के साथ-साथ समाज की सुरक्षा और नैतिकता पर भी बात हो।
लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
पंडाल में आए श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच इन पोस्टरों को लेकर खूब चर्चा रही।
कुछ लोगों ने कहा — “ये एक सकारात्मक संदेश है, जिससे समाज को जागरूक किया जा रहा है।”
वहीं कुछ अन्य लोगों ने सवाल उठाए — “क्या धार्मिक आयोजनों को राजनीति और विवाद से जोड़ा जाना चाहिए?”
सोशल मीडिया पर भी इन पोस्टरों की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और गोरखपुर में यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
धर्म, राजनीति और समाज — तीनों के संगम की झलक
गोरखपुर का यह मामला सिर्फ एक पूजा पंडाल तक सीमित नहीं रहा। यह एक प्रतीक बन गया है उस नए दौर का, जहां धार्मिक मंच अब समाजिक संदेश और राजनीतिक भावनाओं को भी साथ लेकर चल रहे हैं।
लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों में अगर सकारात्मक चेतना और संस्कारों की रक्षा का सन्देश दिया जाए, तो समाज के लिए यह स्वागतयोग्य पहल मानी जानी चाहिए।
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