Meerut: इन्हें सिर्फ बुर्के की जानकारी है, सिंदूर का सम्मान नहीं पता, हलाल से मिलने वाला पैसा आतंकवाद पर खर्च होता है

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Meerut: संगीत सोम के बयानों में बुर्का, हलाल और आतंकवाद पर तीखा प्रहार, महिलाओं के दिवाली कार्यक्रम के बीच सनसनी। |

Meerut में भाजपा नेता संगीत सोम ने बुर्के को लेकर आक्रामक बयान, नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम में उठाए कई संवेदनशील मुद्दे

मेरठ,  दिवाली के पावन अवसर पर जब शहर में रौशनी और खुशियों की बहार थी, तभी भाजपा नेता संगीत सोम ने न केवल नारी सशक्तिकरण के तहत महिलाओं को उपहार वितरित किया, बल्कि अपने तीखे और विवादास्पद बयानों से राजनीतिक गलियारों और सामाजिक मंचों पर सनसनी मचा दी।
करीब 1000 महिलाओं के बीच, उन्होंने आतंकवाद, चुनावी राजनीति और धार्मिक संवेदनशील मुद्दों पर सीधे-सीधे वार किए। उनकी भाषा, उनकी बातों का अंदाज और संदर्भ सभी बेहद आक्रामक और विवादास्पद थे।

बुर्के और आतंकवाद पर तीखा प्रहार

संगीत सोम ने कहा कि देश में होने वाली कई बड़ी आतंकवादी घटनाएँ और फर्जीवाड़ेबुर्के की आड़ में” हो रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम महिलाएं जब विदेश जाती हैं या हज करने जाती हैं, तब उनका चेहरा साफ दिखाई देता है, लेकिन मतदान करने के समय वे क्यों चेहरे को छिपाती हैं?
संगीत सोम ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर वे चुनाव आयोग को शिकायत भी करेंगे।
उनका यह बयान न केवल धार्मिक और राजनीतिक विवादों को जन्म दे रहा है, बल्कि पूरे मेरठ और आसपास के जिलों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

 विपक्ष पर साधा तंज, तेजस्वी, अखिलेश और राहुल पर निशाना

संगीत सोम ने सीधे विपक्ष के नेताओं पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा,

“इन नेताओं को सिंदूर का सम्मान नहीं पता, इन्हें सिर्फ बुर्के की जानकारी है।”
यह बयान न केवल राजनीतिक विरोधियों के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि चुनावी माहौल में इसे संवेदनशील और सनसनीखेज कहा जा रहा है।
बिहार चुनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा केवल नीतीश कुमार हैं, जिससे आगामी चुनाव में विपक्ष की संभावनाओं पर सवाल उठ गए।

आजम खान के बयान पर करारा पलटवार

संगीत सोम ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में छाए हुए आजम खान के बयान “जो दीया जला सकते हैं वो कुछ भी जला सकते हैं” पर भी तीखा प्रहार किया।
उन्होंने कहा,

“वे इस पर तो नहीं बोलते कि जो बकरे की गर्दन काट सकता है, वो किस-किस की गर्दन काट सकता है।”
यह प्रतिक्रिया न केवल व्यक्तिगत हमला थी, बल्कि इसे उन्होंने सुरक्षा और आतंकवाद की गंभीरता के संदर्भ में रखा।

 हलाल सर्टिफिकेट और आतंकवाद का संबंध

संगीत सोम ने हलाल सर्टिफिकेट को लेकर भी बयान दिया। उनका कहना था कि

“हलाल सर्टिफिकेट से मिलने वाला पैसा आतंकवाद के लिए प्रयुक्त होता है और इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए।”
इस बयान ने न केवल धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में हलचल मचा दी, बल्कि सरकारी निगरानी और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।

नारी सशक्तिकरण और दिवाली उत्सव का संगम

हालांकि इस अवसर का मूल उद्देश्य था नारी सशक्तिकरण और महिलाओं में सशक्त होने का संदेश देना।
करीब 1000 महिलाओं ने भाजपा नेता के साथ दिवाली उपहार प्राप्त किए और उन्होंने इस पहल की सराहना की।
संगीत सोम ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि

“आपकी भागीदारी और सहयोग से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और देश में सुरक्षा, विकास और संस्कृति का संतुलन मजबूत होगा।”
यह पहल दिखाती है कि दिवाली का सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी कार्यक्रम में शामिल किया गया।

राजनीतिक, सामाजिक और चुनावी असर

संगीत सोम के ये बयानों ने न केवल मेरठ बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया।

बुर्के और मतदान संबंधी बयान ने धार्मिक भावनाओं को छेड़ा।

हलाल सर्टिफिकेट पर टिप्पणी ने सुरक्षा और आतंकवाद पर जोर डाला।

विपक्ष पर निशाना साधकर चुनावी माहौल को और तत्पर और संवेदनशील बनाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत सोम के इस भाषण ने दिवाली उत्सव को केवल सामाजिक कार्यक्रम न रहकर राजनीतिक और राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया।

मेरठ की यह दिवाली इस बार सिर्फ दीपों की रौशनी नहीं, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी और सनसनी की वजह से याद रखी जाएगी।
संगीत सोम ने स्पष्ट किया कि उनके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा, नारी सशक्तिकरण और चुनावी पारदर्शिता सर्वोपरि हैं।
उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में नया हंगामा और बहस का माहौल खड़ा कर दिया है, और जनता को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि देश में आतंकवाद, राजनीति और धर्म का संतुलन किस दिशा में जा रहा है।

Pilibhit जहां हर कदम कह रहा है मेरा भारत, मेरा गर्व — एक भारत, श्रेष्ठ भारत!

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