मां दुर्गा की चौथी शक्ति हैं माँ कूष्माण्डा देवी – जानिए इनकी शक्ति और नाम का रहस्य
UP Desk – भक्तों और देवी सज्जनों शारदीय नवरात्री के इस पावन पर्व पर सभी को शुभकामनाएं और माता रानी आदि शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा से प्रार्थना है कि वह हम सब पर अपनी कृपा बनाये रखें। भक्तों जैसा कि आप जानते हैं कि इस वक्त शारदीय नवरात्री के दिन चल रहे हैं। जिसका आज चौथा दिन है। आज के चौथे दिन मां कुष्मांडा देवी की पूजा अर्चना की जाती है। यह रूप माँ आदि शक्ति का चौथी शक्ति का रूप माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माँ आदि शक्ति के चौथे रूप को माँ कुष्मांडा देवी क्यों कहा गया। अगर नहीं जानते हैं तो आज हम आपको माँ के इस रूप और नाम के विषय पर बताने जा रहे हैं। तो चलिए आगे और बने रहिए हमारे साथ।
जानिए मां कुष्मांडा देवी की शक्ति और रूप
नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कूष्माण्डा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कूष्माण्डा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी तब चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था। तब माँ कुष्मांडा देवी ने अपने ईषत् हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें सृष्टि की आदि स्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। माँ कुष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए माता रानी अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। माँ कुष्मांडा देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कूष्माण्डा कहते हैं। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतरी लोक में है। सूर्यलोक में रहने की क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करनी चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है।
“भक्तों एक बार प्रेम से बोलो – जय माता दी – जय हो माँ कूष्माण्डा”