पूर्व विधायक सलिल विश्नोई ने किया औचक निरीक्षण, जानी पानी सप्लाई की बाधा, फिर उठाया यह कदम

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रिपोर्ट – कपिल मिश्रा 

उत्तर प्रदेश के कानपुर में बीते कुछ दिनों से सरकारी पाइपलाइन से पानी की सप्लाई बाधित होने से कई इलाकों में लोग परेशान हैं। जल संकट की स्थिति ऐसी हो गई कि आम जनता को पीने के पानी के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी।

सलिल विश्नोई ने उठाया यह कदम 

इस बीच क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं ने पहल की। उदाहरण के तौर पर, पूर्व विधायक सलिल विश्नोई खुद जनता की परेशानी जानने के लिए मैदान में उतरे। शनिवार रात को उन्होंने गणेश शंकर विद्यार्थी पार्क और फीलखाना में पानी की आपूर्ति बाधित होने की समस्या का निरीक्षण किया।

जांच में आया यह सामने 

जांच में यह सामने आया कि मेट्रो परियोजना के तहत चल रही खुदाई के दौरान गंगा बैराज की एक महत्वपूर्ण पाइपलाइन ब्लॉक हो गई थी। इसी कारण पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई थी और स्थानीय लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे थे।

निरीक्षण के दौरान जैसे ही सलिल विश्नोई को इस समस्या की जानकारी मिली, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को बुलाकर ब्लॉकेज को खुलवाने का निर्देश दिया। इसके बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी कि दो से तीन दिनों के भीतर गंगा बैराज का पानी फीलखाना टंकी तक पहुँचने लगेगा।

सड़क डसने की मिली थी सूचना 

इसी दौरान एक और समस्या की ओर भी ध्यान गया। माल रोड स्थित मरकरी ड्राई क्लीनर्स और इंडियन बैंक के पास सड़क धंसने की घटना सामने आई। जांच में पाया गया कि पिछली सरकार के समय डाली गई पाइपलाइन लीकेज के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई। प्रारंभिक जांच से पता चला कि पाइपलाइन अपेक्षित गहराई में नहीं डाली गई थी और दबाव को सहन न कर पाने की वजह से फट गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाइपलाइन डीसी क्वालिटी की डाली जाती तो यह स्थिति नहीं बनती।

पढ़िए क्या बोली जनता 

स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते यदि समस्या का समाधान कर दिया जाए तो आने वाले दिनों में पानी की सप्लाई सामान्य हो सकती है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है और पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य भी शुरू किया जा रहा है।

यह पूरा प्रकरण न केवल शहर की पानी सप्लाई व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि विकास कार्यों के दौरान बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

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