कानपुर की डॉ. संजीविनी शर्मा को मिला प्लैनेट बडी अवार्ड, ईटी नाउ ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी समिट ने किया सम्मान

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कानपुर की पर्यावरणविद् डॉ. संजीवनी शर्मा ने शहर और प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्हें ईटी नाउ (ET Now) द्वारा आयोजित ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी समिट में प्रतिष्ठित प्लैनेट बडी अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस मंच पर भारत से कुल आठ लोगों को यह उपलब्धि मिली, लेकिन कानपुर से यह सम्मान सिर्फ डॉ. शर्मा के हिस्से में आया।

पर्यावरण संरक्षण में रहा सराहनीय योगदान

यह पुरस्कार डॉ. शर्मा को जलवायु संरक्षण, प्लास्टिक और ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सतत विकास (Sustainable Development) के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए दिया गया।

वह कई वर्षों से स्वच्छता, पुनर्चक्रण और कचरा प्रबंधन से जुड़ी जागरूकता गतिविधियों को संचालित कर रही हैं। खास बात यह है कि उन्होंने न सिर्फ शहर में, बल्कि गंगा तट की सफाई में भी लगातार महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कानपुर प्लॉगर्स संगठन की संस्थापक

डॉ. शर्मा कानपुर प्लॉगर्स नामक युवा-नेतृत्व वाले संगठन की संस्थापक हैं। यह संस्था कई वर्षों से शहर की सड़कों, पार्कों और नदी तटों पर स्वच्छता अभियान चला रही है। इस संगठन की खासियत यह है कि इसमें अधिकांश युवा और छात्र स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं, जो प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा कर उसका उचित प्रबंधन करते हैं।

संगठन द्वारा समय-समय पर आयोजित की जाने वाली प्लॉगिंग रन और स्वच्छता मुहिम ने न सिर्फ शहरवासियों को जागरूक किया बल्कि पर्यावरण को बचाने की दिशा में ठोस संदेश भी दिया है।

सतत विकास की दिशा में कदम

आज के समय में बढ़ते प्रदूषण और बदलते मौसम ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में डॉ. शर्मा का यह प्रयास और उपलब्धि न केवल प्रेरणादायक है बल्कि समाज के लिए एक उदाहरण भी है। उन्होंने साबित किया कि यदि व्यक्ति ठान ले तो सामूहिक प्रयासों से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला सम्मान

ईटी नाउ द्वारा आयोजित इस समिट में दुनिया के कई देशों से पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस मंच पर जब डॉ. शर्मा को प्लैनेट बडी अवार्ड से सम्मानित किया गया तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा –“यह उपलब्धि केवल मेरी व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि उन सभी युवाओं और स्वयंसेवकों की है जो धरती को बचाने के मिशन में मेरे साथ खड़े हैं।”

युवाओं को जोड़ा आंदोलन से

कानपुर में डॉ. शर्मा का सबसे बड़ा योगदान यह माना जाता है कि उन्होंने युवाओं को पर्यावरण आंदोलन से जोड़ा। उनकी पहल ने हजारों युवाओं को यह समझाया कि सतत विकास (Sustainable Development) केवल सरकार या संस्थाओं का कार्य नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाए, जैसे सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, कचरे का सही प्रबंधन और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता पर ध्यान, तो धरती को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

कानपुर और देश के लिए है गर्व का क्षण

डॉ. शर्मा की यह उपलब्धि न केवल कानपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और भारत के लिए गर्व का क्षण है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास भी वैश्विक मंच पर पहचान दिला सकते हैं।

साथ ही, यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा है कि यदि हम अपनी जिम्मेदारी समझें तो धरती को प्रदूषण और जलवायु संकट से बचा सकते हैं।

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