पढ़िए कितने बजे जलाया जाएगा रावण और क्या है शुभ मुहूर्त, शमी के पेड़ की पूजा क्यों मानी जाती है सबसे शुभ

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नमस्कार साथियों,
आप सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। दशहरा का पर्व भारत में उत्साह और उमंग से मनाया जाता है। इस दिन हर नागरिक असत्य पर सत्य की जीत और अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव मनाता है। देशभर में जगह-जगह रावण के पुतले का दहन किया जाता है। किंतु कई लोगों के मन में यह प्रश्न रहता है कि आखिर इस वर्ष रावण दहन का सही समय और शुभ मुहूर्त कब है। आइए जानते हैं।दशहरा और रावण दहन का महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार, अश्विन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को भगवान श्रीराम ने लंका में रावण का वध किया था। यह घटना प्रदोष काल में हुई थी, इसलिए रावण दहन का समय भी इसी अवधि में सबसे शुभ माना जाता है। विजयदशमी का पर्व केवल रावण वध की स्मृति भर नहीं है, बल्कि यह सदैव धर्म की विजय और अधर्म के अंत का प्रतीक है।

2025 में रावण दहन का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष दशहरा 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, रावण दहन का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर रात 08 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इस अवधि को प्रदोष काल कहा जाता है और इसी समय पर रावण दहन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

जानिए इस वर्ष के योग और विशेषताएं

दशहरा 2025 को कई विशेष योग बन रहे हैं, जो इस पर्व को और भी पावन बना देते हैं।

* सुकर्मा योग और धृति योग इस दिन बन रहे हैं, जिन्हें अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।
* इस बार दशहरे के दिन पंचक और भद्रा का दोष नहीं है। पंचक अगले दिन यानी 3 अक्टूबर से लगेगा।
* ऐसे में इस वर्ष दशहरे का पर्व बेहद मंगलकारी और शुभ माना जा रहा है।

वर्षों से चली आ रही है शस्त्र पूजन की परंपरा

दशहरा पर्व पर शस्त्र पूजन की परंपरा भी प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने रावण वध से पहले अपने शस्त्रों की पूजा की थी। इसलिए इस दिन शस्त्रों का पूजन करने से साहस, विजय और बल की प्राप्ति होती है। देशभर में आज भी कई स्थानों पर सेनाओं और पुलिस बलों द्वारा विशेष रूप से शस्त्र पूजन का आयोजन किया जाता है।

पढ़िए क्यों शुभ मानी जाती है शमी के वृक्ष की पूजा

विजयदशमी पर शमी के वृक्ष की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, पांडवों ने अपने वनवास के दौरान अपने शस्त्र शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे। युद्ध से पूर्व उन्होंने इन्हें उसी स्थान से प्राप्त कर विजय हासिल की थी। तभी से शमी पूजा की परंपरा दशहरे से जुड़ी है।

जानिए दशहरा और लोक परंपराएं

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में दशहरे से जुड़ी अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कहीं इसे दुर्गा पूजा के समापन पर्व के रूप में मनाया जाता है, तो कहीं रावण दहन और मेले के आयोजन होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व नए कार्यों की शुरुआत और शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से उत्तम माना जाता है।

पढ़िए विजयदशमी का संदेश

दशहरा पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आयें, धर्म और सत्य की राह अपनाने वाला अंततः विजयी होता है। रावण दहन का संदेश है कि अहंकार, अन्याय और अत्याचार का अंत निश्चित है, जबकि सद्गुण, धैर्य और विवेक सदा विजयी होते हैं।

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