कानपुर: बीएड छात्रा ने छेड़खानी व मारपीट का लगाया आरोप, थाने में नहीं की गई सुनवाई
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उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन लगातार कदम उठा रहा है। मुख्यमंत्री और डीजीपी स्तर से लगातार निर्देश दिए जाते हैं कि महिलाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। हालांकि, जमीनी हकीकत कई बार इन प्रयासों को सवालों के घेरे में खड़ा कर देती है। ताजा मामला कानपुर के बिधनू थाना क्षेत्र का है, जहां एक बीएड छात्रा ने छेड़खानी और मारपीट की शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उसकी बात तक नहीं सुनी।
घर आकर की गई थी मारपीट
दरअसल, बिधनू क्षेत्र के गांव हाजीपुर मंझावन की रहने वाली छात्रा काजल कुशवाहा का आरोप है कि गांव के ही कुछ युवक आए दिन उसके साथ छेड़खानी करते हैं। छात्रा का कहना है कि जब उसने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने न केवल उसके घर पर आकर गाली-गलौज किया बल्कि उस पर और उसकी छोटी बहन पर भी हमला कर दिया।
छात्रा ने आरोप लगाया कि 30 तारीख की शाम को उक्त युवक अपनी आई ट्वेंटी कार से आए और घर में घुसकर मारपीट की और उसके कपड़े फाड़ने तक की कोशिश की। इस घटना से छात्रा और उसके परिवार में भय और आक्रोश का माहौल है।
थाने में नहीं की गई सुनवाई
महिला सुरक्षा को लेकर प्रशासन जहां एक ओर संवेदनशील होने का दावा करता है, वहीं छात्रा के अनुसार जब वह थाने पहुंची और पूरी घटना की तहरीर दी, तो पुलिस ने न केवल उसकी शिकायत दर्ज करने से इनकार किया बल्कि उसे थाने से बाहर जाने के लिए कह दिया। यह रवैया न केवल पीड़िता के लिए निराशाजनक है बल्कि महिला सुरक्षा के प्रयासों पर भी सवाल खड़ा करता है।
वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय मिल सके। केवल अभियुक्तों पर कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि थाना स्तर पर लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है।
प्राथमिकता में शामिल है महिला सुरक्षा
महिला सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए ऐसे मामलों में गंभीरता से कदम उठाना आवश्यक है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करेगा बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अविश्वास भी बढ़ेगा।