Kannauj News : यह कैसे रिश्ते ? : दो बेटो के बाद भी तन्हाई में रह रहे पिता की मौत

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रिपोर्ट : संदीप शर्मा

कन्नौज। ऐसा परिवार होने के क्या फायदा कि, अपनों की सुध ना ली जा सके। तीन दिनों तक घर में अकेले रह रहे पिता का शव घर के अंदर सड़ता रहा और बेटे अपनी नौकरी करते रहे, वहीं पत्नी भी घटना से बेखबर रही। शहर के ग्वाल मैदान में निवास करने वाले अरुण मिश्रा कानपुर की एक खाद कंपनी से रिटायर थे। घर में अकेले ही रहते थे। अरुण के दो बेटे जिनमे प्रदुम्न और अक्षय साफ्टवेयर इंजीनियर हैं, प्रदुम्न अमेरिका तो अक्षय बैंगलोर में किसी कंपनी में काम करते हैं। अरुण की पत्नी बड़े बेटे प्रदुम्न के साथ अमेरिका में रहती हैं। कुछ समय पहले अरुण कानपुर की एक खाद फैक्ट्री में काम करने के दौरान कानपुर की एल्डिगो सोसाइटी के पीछे फ्लैट में रहते थे। अरुण से आय दिन झगड़े के कारण पत्नी बेटे के साथ अमेरिका चली गईं थीं। वही रिटायरमेंट के बाद अरुण बीते 3 सालों से अपने कन्नौज स्थित पुस्तैनी मकान में रह रहे थे।

कन्नौज स्थित मकान से जब बदबू आना शुरू हुआ तो आसपास के लोग परेशान हो गये। अनहोनी घटना की संभावना पर पुलिस को सूचना दी गई। जिसके बाद सीओ सदर कमलेश कुमार कोतवाली कन्नौज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। मकान के अंदर पहुंचकर देखा तो पता चला कि केबल तौलिया के सहारे एक शव जमीन पर पड़ा था। शव सी बदबू आ रही थी। घर का दरवाजा भी अंदर से बंद था। घर का सारा सामान भी ब्यबस्थित रखा हुआ था, इसलिये चोटी लूटपाट की भी संभावना नहीं थी।संभावना जताई गई कि 75 वर्षीय अरुण पानी की बाल्टी उठाने के दौरान करीब 72 घंटे पहले (शव को देखकर) गिर गए होंगे और उनकी मौत हो गई होगी। घटना की जानकारी से जहां मोहल्ले में हड़कंप मच गया वहीं पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवा दिए है। घटना की सूचना से मृतक के बेटों को भी अवगत करवा दिया गया है। पुलिस ने अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है। उधर मृतक का छोटा बेटा अक्षय अपने पिता का अंतिम संस्कार करने गुरुवार को कन्नौज पहुंचा। और प्रक्रिया पूरी की गई। सवाल यह है कि कैसे रिश्ते हो गये हैं आज कल के। कोई किसी से मतलब नहीं रखना चाहता, कोई किसी का हाल चाल नहीं लेना चाहता। भाग दौड़ भरी जिंदगी में टेंशन और काम का लोड अपनों को अपनों से अलग कर रहा है। शायद इसी जिंदगी की भाग दौड़ में दो बेटे और पत्नी होने के बाद भी एक पिता और पति की तीन दिनों तक सुध नहीं ली गई और घर में तन्हा रह रहे पिता/पति का शव खराब होता गया। यह वही पिता हैं, जिन्होंने अपने विदेश रह रहे बच्चों को उंगली पकड़कर चलना सिखाया था, और पत्नी को अपने सुख दुख का साथी बनाया था।बदलते हुये परिवेश में आखिर हमको अपने खून के रिश्तों के बारे में क्या सोचना नहीं चाहिए। सवाल तो है, पर जवाब शायद आप के पास?

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