जैसलमेर बस अग्निकांड: जांच में खुला बस निर्माण का काला सच
Jaisalmer Bus Fire Accident जांच में जैनम वर्कशॉप की 66 बसें सीज
Jaisalmer Bus Fire Accident: जैनम वर्कशॉप में बनी बस में खामियां, 66 बसें सीज, जांच में कई खुलासे
राजस्थान के जैसलमेर में हुए Jaisalmer Bus Fire Accident ने पूरे देश को हिला दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद जांच में सामने आया कि जिस बस में आग लगी, उसकी बॉडी जोधपुर के पास मोगरा में स्थित जैनम कोच क्राफ्टर्स वर्कशॉप में तैयार की गई थी। अब परिवहन विभाग ने इस वर्कशॉप की 66 बसों को सीज कर दिया है।
बस निर्माण प्रक्रिया में खामियां
जैनम कोच क्राफ्टर्स वर्कशॉप में बस निर्माण की प्रक्रिया चेसिस से शुरू होती है। पहले लोहे का ढांचा (फ्रेम) तैयार किया जाता है, फिर सीटें, केबिन और वायरिंग लगाई जाती है। जांच में सामने आया कि कई बसों में वायरिंग और स्ट्रक्चरल सेफ्टी के मानकों का पालन नहीं किया गया। हादसे के बाद परिवहन विभाग ने सभी 66 बसों को जांच पूरी होने तक सीज कर दिया है।
इमरजेंसी गेट पर गंभीर सवाल
परिवहन विभाग की टीम ने उसी मॉडल की बसों की जांच की जो हादसे में शामिल थी। रिपोर्ट में पाया गया कि इमरजेंसी गेट अंदर की ओर खुलता है, जबकि नियमों के अनुसार इसे बाहर की ओर खुलना चाहिए। यह बड़ा सुरक्षा उल्लंघन माना जा रहा है। बस के संकरे गलियारे और सीटों की गलत प्लेसमेंट ने यात्रियों के निकलने का रास्ता बाधित किया, जिससे हादसे में जानें गईं।
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एसी वायरिंग और रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी
जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ — जिस बस में आग लगी, वह नॉन-एसी वाहन के रूप में रजिस्टर्ड थी, लेकिन बाद में उसमें एसी लगाया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना अनुमोदन के एसी लगाने से विद्युत लोड बढ़ गया, जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा कई गुना बढ़ गया। अब इस एसी सिस्टम और वायरिंग की भी गहन जांच की जा रही है।
परिवहन विभाग की बड़ी कार्रवाई
जोधपुर के जिला परिवहन अधिकारी पी.आर. जाट ने बताया कि जैनम कोच क्राफ्टर्स में मौजूद सभी 66 बसों को सीज कर लिया गया है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी आकांक्षा बैरवा की अगुवाई में विशेष जांच टीम काम कर रही है। सभी बसों पर जीआई टैगिंग की गई है और यदि अन्य बसों में भी खामियां पाई गईं, तो वर्कशॉप के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह हादसा बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम है। अगर इमरजेंसी गेट सही दिशा में खुलते और वायरिंग मानकों के अनुसार होती, तो शायद इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। यह घटना राज्यभर के निजी बस निर्माताओं और परिवहन विभाग दोनों के लिए चेतावनी है कि सुरक्षा पर समझौता अब किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा।
Jaisalmer Bus Fire Accident ने दिखा दिया है कि बस निर्माण में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब यह जांच आने वाले समय में बस उद्योग में सुरक्षा के नए मानक तय कर सकती है।
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