IIT Kanpur में पहली बार ‘ह्यूमन-सेंटर्ड डिफेंस डिज़ाइन’ कार्यशाला, रक्षा क्षेत्र में नवाचार की नई दिशा

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कानपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर देश में रक्षा नवाचार प्रणाली में एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। संस्थान 16 और 17 सितंबर 2025 को भारत की पहली ह्यूमन-सेंटर्ड डिफेंस डिज़ाइन’ (HCD) रणनीतिक कार्यशाला की मेज़बानी करेगा। यह आयोजन प्रबंधन बोर्डरूम और कन्वेंशन एंड एग्ज़ीबिशन सेंटर (PBCEC) में संपन्न होगा।

यह कार्यशाला DRDO-इंडस्ट्री-एकेडेमिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (DIA-COE) और IIT कानपुर के डिज़ाइन विभाग के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में मानवीय दृष्टिकोण को शामिल कर सुरक्षा, उपयोगिता और विश्वसनीयता को नई दिशा देना है।

ह्यूमन-सेंटर्ड डिज़ाइन क्यों महत्वपूर्ण है?

अब तक रक्षा तकनीक मुख्य रूप से अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकी श्रेष्ठता पर केंद्रित रही है। लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में तकनीक के साथ-साथ इसका उपयोग करने वाले लोगों की सुरक्षा और अनुभव भी अहम हो गए हैं। इसीलिए HCD कार्यशाला को रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में विकसित होने वाली रक्षा प्रणालियाँ न केवल तकनीकी रूप से उन्नत हों, बल्कि उन्हें इस्तेमाल करने वाले सैनिकों और अधिकारियों के लिए अधिक उपयोगकर्ता-हितैषी, सुरक्षित और सहज भी बनाया जा सके।

कार्यशाला का उद्देश्य और रूपरेखा

दो दिवसीय इस कार्यशाला में रक्षा संगठनों, उद्योग जगत और शैक्षणिक जगत के विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यक्रम में कई विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चा और समूह आधारित विचार-मंथन सत्र होंगे। इन चर्चाओं के आधार पर प्रतिभागी मिलकर एक ड्राफ्ट व्हाइट पेपर तैयार करेंगे। यह दस्तावेज़ आने वाले समय में रक्षा नवाचार प्रणाली में HCD को लागू करने की दिशा में मार्गदर्शक बनेगा।

विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी

इस कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और IIT कानपुर के कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनमें प्रमुख नाम हैं:

* श्री एल.सी. मंगल – डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट एवं डायरेक्टर जनरल (टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट), DRDO
* डॉ. एन. रंजन – निदेशक, डायरेक्टरेट ऑफ फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट (DFTM), DRDO
* प्रो. तरुण गुप्ता – डीन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, IIT कानपुर
* श्री संजय टंडन – निदेशक, DIA-COE, IIT कानपुर
* प्रो. सत्यकी रॉय – प्रमुख, डिज़ाइन विभाग, IIT कानपुर
* डॉ. विवेक कांत – एसोसिएट प्रोफेसर, डिज़ाइन विभाग, IIT कानपुर (कार्यशाला के मेज़बान)

ये सभी विशेषज्ञ शैक्षणिक, रणनीतिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से कार्यशाला का मार्गदर्शन करेंगे।

HCD वर्टिकल की स्थापना की तैयारी

कार्यशाला के बाद IIT कानपुर स्थित DIA-COE में एक समर्पित HCD वर्टिकल स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य रक्षा अनुसंधान और विकास में मानवीय कारकों को प्राथमिकता देना और ऐसे समाधान विकसित करना होगा जो तकनीकी रूप से सशक्त होने के साथ-साथ मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित हों।

डॉ. विवेक कांत ने कहा: “यह भारत में रक्षा क्षेत्र के लिए अपनी तरह की पहली भागीदारी आधारित कार्यशाला है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि रक्षा तकनीक केवल अत्याधुनिक ही न हो, बल्कि उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय भी हो।”

IIT कानपुर की प्रतिबद्धता

IIT कानपुर लंबे समय से अनुसंधान, नवाचार और रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। यह कार्यशाला इस प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी। संस्थान का मानना है कि बहु-विषयक शोध, उद्योग और अकादमिक साझेदारियों के माध्यम से ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और उपयोगकर्ता-केंद्रित नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।

IIT कानपुर का परिचय

1959 में स्थापित IIT कानपुर को भारत सरकार ने राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया है। यह संस्थान विज्ञान, इंजीनियरिंग, डिज़ाइन और प्रबंधन शिक्षा में अग्रणी माना जाता है। यहाँ 19 विभाग, 26 केंद्र, 3 अंतरविषयी कार्यक्रम और 2 विशेषीकृत स्कूल संचालित हैं।

IIT कानपुर के पास 1,050 एकड़ में फैला हरा-भरा परिसर है, जिसमें 590 से अधिक प्रोफेसर और 9,500 से अधिक छात्र शोध और अध्ययन में सक्रिय हैं। दशकों से यह संस्थान देश-विदेश में अनुसंधान और नवाचार का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

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