कानपुर: शिक्षकों ने TET अनिवार्यता के विरोध में सौंपा ज्ञापन, सेवा नियमावली के अनुरूप समाधान की मांग
कानपुर। हजारों शिक्षकों ने सरकार द्वारा पूर्व से कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी (TET) अनिवार्य किए जाने का विरोध दर्ज कराया। संगठन से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि यह प्रावधान सरकार द्वारा निर्धारित सेवा शर्तों और सेवा नियमावली के विपरीत है। विरोध के दौरान सैकड़ों शिक्षक एकजुट होकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
इस विरोध कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष योगेन्द्र कुमार सिंह ने की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मांग रखी कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिक्षक संगठनों की एकजुटता
विरोध प्रदर्शन के दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से विकास तिवारी (महामंत्री), राजा भरत अवस्थी (अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद), **राजेश तिवारी (जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ) सहित विक्रम सिंह, मोहम्मद अनस, इज़हार आलम, शिवेंद्र सिंह, शिव प्रकाश तिवारी, धीरेंद्र यादव, विजय श्रीवास्तव, मीरा प्रजापति, समीर मिश्रा, रुखसार अहमद, सौरभ पांडे, राकेश पाल और राघवेंद्र सिंह शामिल रहे।
इन सभी ने सामूहिक रूप से ज्ञापन में यह मांग रखी कि सरकार तुरंत आदेश जारी कर टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त करे।
शिक्षकों की प्रमुख दलील
शिक्षकों का तर्क है कि वे पहले से वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उन्होंने नियुक्ति के समय सभी आवश्यक नियमों और योग्यताओं को पूरा किया था। ऐसे में अब नई शर्तों को थोपना न केवल अव्यवहारिक है बल्कि शिक्षा व्यवस्था के लिए भी अनुचित है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी महोदय ने शिक्षकों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि ज्ञापन को उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की आवाज सरकार तक पहुंचेगी और उनके मुद्दों पर उचित विचार किया जाएगा।