Sohna Assembly Election: यहां से कभी चुनाव नही जीता स्थानीय प्रतियाशी, जानिए इस सीट का इतिहास
Sohna Assembly Election: हरियाणा के गठन के साथ ही सोहना विधानसभा सीट ने राजनीति में अपना एक विशिष्ट स्थान बना लिया है। यह सीट हमेशा से चर्चाओं में रही है, जहां हर चुनाव में रोचक परिणाम सामने आए हैं। 1967 में हुए पहले चुनाव से लेकर 2019 तक के चुनावों में सोहना ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। यहां एक खास बात यह है कि अब तक कोई भी स्थानीय प्रत्याशी इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाया है।
प्रारंभिक राजनीतिक इतिहास
1967 में सोहना विधानसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुए, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी राव महावीर ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1968 में एक और निर्दलीय प्रत्याशी कन्हैयालाल पोसवाल विजयी हुए। 1972 में फिर से कन्हैयालाल पोसवाल ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद 1977 के चुनाव में कांग्रेस के विजयपाल विधायक बने और पार्टी की पकड़ इस सीट पर मजबूत होती गई।
निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा
सोहना विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवारों का भी गहरा प्रभाव रहा है। 1982 में जन नायक पार्टी के विजयवीर विधायक बने, जबकि 1987 में राव धर्मपाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। 1991 के चुनाव में फिर से निर्दलीय राव धर्मपाल ने विजय प्राप्त की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सोहना के मतदाता किसी भी राजनीतिक दल के बजाय उम्मीदवार के व्यक्तित्व और काम को प्राथमिकता देते हैं।
कांग्रेस और हरियाणा विकास पार्टी का योगदान
1996 में कांग्रेस के राव नरबीर सिंह ने इस सीट से जीत हासिल की और कांग्रेस का दबदबा फिर से मजबूत हुआ। 2000 में राव धर्मपाल ने इस बार हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। 2005 के चुनाव में कांग्रेस के सुखबीर जौनापुरिया विधायक बने, जिससे यह साफ हुआ कि कांग्रेस का इस क्षेत्र में प्रभाव बना हुआ है।
बीजेपी का उदय और हालिया चुनाव परिणाम
सोहना विधानसभा सीट पर 2009 के चुनाव में चौधरी धर्मबीर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पहली बार इस सीट पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। बीजेपी के तेजपाल तवर ने 2014 के चुनाव में जीत हासिल की, और 2019 में भी बीजेपी ने इस सीट को बरकरार रखते हुए संजय सिंह को विधायक बनाया। इस जीत के साथ ही यह साफ हो गया कि सोहना के मतदाताओं का रुझान बीजेपी की ओर बढ़ रहा है।
जातीय समीकरण और मतदाता संरचना
सोहना विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण का खासा महत्व है। 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या लगभग 37,617 है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 16.35% हिस्सा है। वहीं, मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 47,395 (20.6%) है। यह सीट गुड़गांव जिले में स्थित है और गुड़गांव संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इसके अलावा, यहां ग्रामीण मतदाता लगभग 74.72% हैं, जबकि शहरी मतदाता 25.28% हैं।
2019 के चुनाव परिणाम और मतदान विश्लेषण
2019 के विधानसभा चुनाव में सोहना विधानसभा सीट पर कुल 230,071 मतदाता पंजीकृत थे, और मतदान प्रतिशत 71.06% रहा। इस चुनाव में बीजेपी के संजय सिंह ने जननायक जनता पार्टी (JJP) के रोहतास सिंह को 12,453 वोटों के अंतर से हराया। 2019 के संसदीय चुनाव में इस क्षेत्र में 68.29% मतदान हुआ, जो इस क्षेत्र में राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।
बहरहाल, सोहना विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास गहरे उतार-चढ़ाव और राजनीतिक दलों के बीच कड़े मुकाबलों से भरा हुआ है। 1967 से लेकर 2019 तक इस सीट पर कांग्रेस, बीजेपी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। आगामी चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीजेपी अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकेगी या फिर कांग्रेस और अन्य दल यहां अपना प्रभाव बढ़ाएंगे।