बेटियों की शादी का सरकार उठाएगी पूरा खर्च, जानिए कानपुर में कब है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का आयोजन
कानपुर नगर। गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह अब और भी आसान तथा सम्मानजनक हो जाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना 2025-26 के अंतर्गत बेटियों की शादी का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। इस बार कानपुर नगर को 959 जोड़ों का लक्ष्य मिला है और पहला सामूहिक विवाह समारोह 2 नवम्बर को आयोजित किया जाएगा। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
सरकार का है बड़ा कदम
योजना के अनुसार प्रत्येक विवाह पर सरकार एक लाख रुपये खर्च करेगी। इसमें से 60 हजार रुपये सीधे कन्या के बैंक खाते में भेजे जाएंगे। वहीं 25 हजार रुपये की गृहस्थी सामग्री प्रदान की जाएगी और शेष 15 हजार रुपये पंडाल, भोजन, सजावट और रोशनी जैसी व्यवस्थाओं पर खर्च होंगे। इस प्रकार योजना न केवल आर्थिक सहारा देती है बल्कि गरीब परिवारों के लिए संजीवनी के समान है।
जानिए आवेदन की प्रक्रिया है बेहद सरल
योजना का लाभ लेने के लिए कन्या का उत्तर प्रदेश की मूल निवासी होना अनिवार्य है। इसके साथ ही परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। विवाह की तिथि पर कन्या की आयु कम से कम 18 वर्ष और वर की 21 वर्ष होनी चाहिए।
योजना की एक और खास बात यह है कि अविवाहित, विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा कन्याएँ भी पात्र हैं। साथ ही निराश्रित और दिव्यांग कन्याओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे योजना का दायरा और भी व्यापक हो जाता है।
इस तरह से करें ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
इस योजना में आवेदन करना अब और भी आसान बना दिया गया है। आवेदकों को विभागीय पोर्टल [www.cmsvy.upsdc.gov.in](http://www.cmsvy.upsdc.gov.in) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। विवाह से कम से कम एक सप्ताह पूर्व आवेदन करना आवश्यक है। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक की छायाप्रति अपलोड करना जरूरी है।
सामाजिक समरसता का प्रतीक
जिला समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग देना नहीं है, बल्कि बेटियों के विवाह को सम्मानजनक और सामाजिक रूप से स्वीकृत रूप में संपन्न कराना है। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि यह सामाजिक समरसता और साझा जिम्मेदारी का प्रतीक है।
सुबह लग्न पर ही होगा विवाह
योजना के अंतर्गत यह भी प्रावधान किया गया है कि विवाह केवल शुभ लग्न में ही होंगे। इससे विवाह संस्कारों को अधिक धार्मिक और पारंपरिक गरिमा प्रदान की जाएगी। यही कारण है कि इस योजना को समाज में व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है।