Bulandshahr में 2.25 करोड़ दूध चोरी का खुलासा, 4 गिरफ्तार, एक्शन मोड में DIG कलानिधि नैथानी
Bulandshahr में 2.25 करोड़ रुपये मूल्य की चोरी का खुलासा — डेयरी मालिक, पुत्र और ड्राइवर गिरफ्तार
Bulandshahr (यूपी): उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक बड़ा दूध चोरी स्कैंडल सामने आया है, जिसने इलाके की डेयरी व सुरक्षा व्यवस्था की सीहत को हिला कर रख दिया है। कथित तौर पर खरुजा इलाके में स्थित मधुसूदन के मिल्क प्लांट से 2.25 करोड़ रुपये मूल्य का दूध चोरी का आरोप है। इस घोटाले की गहनता तब सामने आई, जब शिकायतकर्ताओं ने सीएम आदित्यनाथ योगी और मेरठ के DIG को तक पत्र लिख कर न्याय की मांग की, और आखिरकार पुलिस ने कार्रवाई शुरू की — जिसमें खुर्जा देहात पुलिस ने संचालक सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
क्या है पूरा मामला — चोरी कैसे हो रही थी?
बुलंदशहर जिले के खुर्जा देहात क्षेत्र में स्थित ज्योति डेयरी / डेरी प्लांट में आरोप है कि संचालक ओम प्रकाश, उनके पुत्र महेंद्र, कैंटर ड्राइवर भूपेंद्र और मिल्क ऑपरेटर प्रेम कुमार ने मिलकर रोजाना हजारों लीटर दूध चोरी की योजना बनाई थी।
बताया गया है कि ये सभी प्लांट के मिल्क तोला (milk weighing scale) के साथ सांठगांठ कर काम कर रहे थे, असल में प्लांट में आने वाले दूध की मात्रा को कम दिखाकर, उन्होंने चोरी की गयी दूध की सही मात्रा छुपायी।
इस लंबे समय तक हो रही चोरी की वजह से कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, जो 2.25 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया माना जा रहा है।
आरोप और पूछताछ — गिरफ्तारी तक की दास्तां
चोरी के आरोपों और कई शिकायतों के बाद, कंपनी प्रबंधन ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और मेरठ ज़िले के DIG कलानिधि नैथानी को लिखित शिकायत की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि देरी से नहीं, बल्कि जांच में लापरवाही हो रही है और दोषियों को बचाया जा रहा है।
शिकायत के कई महीनों बाद — लगभग 10 महीने बाद — खुर्जा कोतवाली देहात पुलिस ने कार्रवाई की। इस कार्रवाई में ओम प्रकाश, उनका बेटा महेंद्र, ड्राइवर भूपेंद्र और ऑपरेटर प्रेम कुमार को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोप लगाया है कि ये चारों मिलकर चोरी की राशि और दूध चोरी की व्यवस्था चला रहे थे, और प्लांट की मिल्क तोला मशीन में गड़बड़ी कर असल डिलीवरी की मात्रा को छुपा रहे थे।
स्थानीय लोगों और कंपनी का बयान
इस मामले ने स्थानीय डेयरी मजदूरों, किसानों और डेयरी सप्लायर्स के बीच भरोसे का संकट पैदा कर दिया क्योंकि डेयरी प्लांट की विश्वसनीयता दांव पर लग गई है।
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि उनकी कंपनी को न सिर्फ आर्थिक झटका लगा है, बल्कि उनकी नैतिक प्रतिष्ठा भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। “जो दूध मेहनत से इकट्ठा किया गया था, उसका एक बड़ा हिस्सा ग़लत हाथों में चला गया,” कंपनी के एक अधिकारी ने बताया।
दूसरी ओर, आरोपी पक्ष यह दावा कर रहा है कि “कुछ गलतफहमी हुई है” और “वे अपना पक्ष स्पष्ट करेंगे” — लेकिन पुलिस अभी तक सबूतों के आधार पर कदम उठा रही है।
सांकेतिक पहलु, नकली दूध और बड़े पैमाने का मिलावट‑नेटवर्क?
इस घोटाले के खुलासे के समय, बुलंदशहर में पहले से ही डेयरी उद्योग में मिलावट और नकली दूध की घटनाओं पर पहचान बनी हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह सिर्फ चोरी की घटना नहीं, बल्कि डेयरी सेक्टर में गलत दूध उत्पादन की व्यापक समस्या और संरचनात्मक भ्रष्टाचार का हिस्सा हो सकती है।
क्यों यह मामला सिर्फ एक चोर‑कांड नहीं, बल्कि चेतावनी है?
उपभोक्ता स्वास्थ्य और विश्वास का संकट
अगर डेयरी मालिक ही दूध को छुपाकर बेच सकते हैं, तो उपभोक्ताओं को यह डर है कि क्या वे असल में वह दूध ले रहे हैं जो उन्होंने भरोसे के साथ खरीदा था।
डेयरी उद्योग की मॉनिटरिंग का प्रश्न
यह घटना यह सवाल उठाती है कि डेयरी प्लांटों पर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी क्यों कमजोर रही — और ऐसे बड़े आर्थिक घोटालों को रोकने के लिए बेहतर नियंत्रण क्यों लागू नहीं किया गया।
न्याय व्यवस्था में विश्वास
शिकायत के 10 महीने बाद ही गिरफ्तारी हुई। यह देरी उपभोक्ताओं और कंपनी दोनों के लिए चिंता का विषय है कि कानूनी प्रक्रिया समय पर काम क्यों नहीं करती।
व्यापक आर्थिक और सामाजिक असर
डेयरी क्षेत्र लाखों किसानों, दूध देने वालों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर आधारित है। अगर ऐसे घोटाले सामान्य बनते हैं, तो यह सिर्फ एक कंपनी की समस्या नहीं, बल्कि पूरे डेयरी इकोनॉमी के लिए खतरा बन सकता है।
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