Jaipur: चुनावी सर्वे ड्यूटी से परेशान बीएलओ ने की आत्महत्या, जानिए कैसे ?
Jaipur BLO suicide by getting hit by train घटना की रिपोर्ट
Jaipur में BLO Suicide Getting Hit By Train: अधिकारियों पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप, परिवार बेसुध
जयपुर में मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रहे एक बीएलओ ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी। जेब से बरामद सुसाइड नोट में अधिकारियों पर प्रताड़ना, सर्वे कार्यक्रम के दबाव और सस्पेंड करने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लिखे मिले। घटना ने प्रशासनिक कार्यशैली और बीएलओ पर बढ़ते कार्यभार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पूरा मामला अब blo suicide by getting hit by train केस के रूप में जांच के दायरे में है।
घटना कैसे हुई
सुबह 5:10 बजे ट्रेन के आगे कूदकर दी जान
रविवार सुबह कालवाड़ रोड स्थित धर्मपुरा निवासी मुकेशचंद जांगिड़ (48) बिंदायका रेलवे फाटक पहुंचे। फाटक बंद था और तभी बिंदायका स्टेशन से ट्रेन आगे बढ़ रही थी। मुकेश ने अपनी बाइक खड़ी की और अचानक रेलवे ट्रैक पर जाकर ट्रेन के आगे कूद गए। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
जेब से मिला सुसाइड नोट
सर्वे प्रोग्राम का दबाव, प्रताड़ना और सस्पेंशन की धमकी का उल्लेख
पुलिस को मृतक की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने लिखा कि—
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विशेष गहन पुनरीक्षण (SAR) कार्यक्रम का अत्यधिक दबाव
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लगातार प्रताड़ना
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काम न करने पर सस्पेंड करने की धमकी
जिसके कारण वे मानसिक तनाव में थे। नोट में ताराचंद बुनकर नामक अधिकारी पर प्रताड़ित करने का आरोप भी दर्ज है।
पुलिस ने नोट कब्जे में लिया, फोटो लेने से मना किया
परिवार ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
मुकेश के छोटे भाई गजानंद ने बताया कि वे मौके पर पहुंचे तो मृतक की जेब से पैसे, चाबियां और सुसाइड नोट मिला। जब उन्होंने नोट की फोटो लेने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों ने अनुमति नहीं दी।
इससे मामले की जांच पर कई सवाल उठ रहे हैं।
परिवार में कोहराम—पत्नी और बच्चे बेसुध
घर में मातम, रोते-रोते बेहोश हुए परिजन
शाम को जब शव घर पहुंचा तो पत्नी मीना देवी, बेटियां अन्नू, ज्योति, और बेटा अंशु बार-बार बेहोश हो गए। परिवार का कहना है कि मुकेश कभी किसी विवाद में नहीं रहे और पूरी निष्ठा से काम करते थे।
11 साल तक उत्कृष्ट सेवाएं देने वाला बीएलओ
कभी भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई—प्रशासन ने की सराहना
उप जिला निर्वाचन अधिकारी मेघराज मीणा के अनुसार—
“मुकेश हमारे श्रेष्ठ बीएलओ में से एक थे। 11 साल से सेवा दे रहे थे और उनके खिलाफ एक भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई। यदि सुसाइड नोट में आरोप है तो इसकी अलग से जांच करवाई जाएगी।”
प्रशासनिक दबाव की पोल खोलता मामला
जो कर्मचारी मतदान प्रक्रिया संभालते हैं, वे खुद तनाव में
मतदाता सूची पुनरीक्षण में बीएलओ पर बढ़ता दबाव पहले भी विवादों में रहा है। यह घटना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या कर्मचारी अत्यधिक वर्कलोड के कारण मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं?
पुलिस जांच जारी
सुसाइड नोट के आधार पर आगे बढ़ेगी कार्रवाई
बिंदायका थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी है।
जांच रिपोर्ट के बाद शासन स्तर पर भी कार्रवाई की उम्मीद है।
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