बिजनौर में जंगल का नरभक्षी आतंक: 11 साल की मासूम को नोच-नोचकर खाया, गन्ने के खेत में बिखरे अंग, गांव में दहशत

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बिजनौर में जंगल का नरभक्षी आतंक: बिजनौर में तेंदुए ने 11 साल की मासूम को नोच-नोचकर खा डाला, गन्ने के खेत में बिखरे अंग; गांव में दहशत और गुस्सा।

बिजनौर में जंगल का नरभक्षी आतंक: बिजनौर में तेंदुए ने 11 साल की मासूम को नोच-नोचकर खा डाला, गन्ने के खेत में बिखरे अंग; गांव में दहशत और गुस्सा।

यूपी के बिजनौर में इंसानी खून का शिकारी तेंदुआ! – 11 साल की मासूम को नोच-नोचकर खा गया, धड़ और हाथ अलग मिला, गन्ने के खेत में बिखरे अंग, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, प्रशासन पर सवाल

गांव में मातम, जंगल में दहशत – आखिर कब तक खुलेआम मौत बांटेगा ये खूंखार गुलदार?

बिजनौर जिले के नहटौर थाना क्षेत्र में मंडोरी गांव की धरती गुरुवार सुबह खून से लाल हो गई। 11 साल की मासूम कनिका, जो कक्षा-6 की छात्रा थी, तेंदुए के जबड़ों का शिकार बन गई। जिस गन्ने के खेत में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां आज बच्ची के धड़ और हाथ अलग पड़े मिले। हर 10 मीटर पर शरीर के अंग बिखरे थे, पेट की चमड़ी और मांस नोच-नोचकर खाया जा चुका था। यह मंजर देखकर पूरा गांव सहम गया – और मां बेसुध होकर सड़क पर गिर पड़ी।

यह पहली घटना नहीं, पिछले 25 दिनों में यह दूसरा बच्चा है जिसे तेंदुए ने निगल लिया। और पिछले 4 सालों में, बिजनौर और आसपास के इलाकों में 29 लोगों की जान इन खूंखार जानवरों ने ले ली। आखिर कब तक वन विभाग कागजों में बैठकर पिंजरे लगाएगा और मासूमों के शव गन्ने के खेतों में मिलते रहेंगे?

कैसे बनी मासूम कनिका तेंदुए के जबड़ों की शिकार?

बुधवार शाम 7:30 बजे, मंडोरी गांव की 11 साल की कनिका शौच के लिए घर के सामने खेत की तरफ गई थी। यह उसका आखिरी सफर था।

गांववालों ने बताया – “आधे घंटे तक वह लौटी नहीं, तब खोजबीन शुरू हुई। घर से 50 मीटर दूर खून के धब्बे और तेंदुए के पंजों के निशान मिले। तेंदुए ने उसका सिर मुंह में दबाकर गन्ने के खेत की तरफ घसीट लिया था।”

रातभर गांववाले और वन विभाग की टीम लाठी-डंडे लेकर जंगल खंगालते रहे। लेकिन कनिका का कोई सुराग नहीं मिला।

सुबह 6:30 बजे, घर से 500 मीटर दूर खेत में वह दर्दनाक नजारा मिला – बच्ची का शव, क्षत-विक्षत, धड़ और हाथ अलग, मांस के लोथड़े खेत में बिखरे।

गांव का गुस्सा – शव रखकर सड़क जाम, वन विभाग पर गंभीर आरोप

सुबह होते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने बच्ची के शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया, जाम लगाया, और नारेबाजी की –
“हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं, तेंदुआ खुलेआम मौत बांट रहा है, वन विभाग क्या कर रहा है?”

ग्राम प्रधान महेश कुमार ने साफ कहा –
“कई दिनों से तेंदुआ गांवों में घूम रहा था, ग्रामीणों ने दर्जनों बार सूचना दी। लेकिन वन विभाग सिर्फ कागजों में नोट करता रहा। अगर कार्रवाई समय पर होती, तो कनिका जिंदा होती।”

मौके पर पहुंचीं एसडीएम रीतु रानी और सीओ धामपुर अभय कुमार पांडे ने परिजनों को शांत कराया, पोस्टमॉर्टम की व्यवस्था कराई और मदद का भरोसा दिया।

वन विभाग ने अब लगाए पिंजरे – लेकिन क्या यह काफी है?

घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में पिंजरे लगाने शुरू कर दिए हैं और गश्त बढ़ा दी है। लेकिन सवाल बड़ा है – जब 29 लोग पिछले 4 सालों में इसी तरह मारे गए, तो आखिर कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन हर बार मासूमों की जान जाने के बाद ही जागेगा?

ग्रामीणों का खौफ – “शाम होते ही दरवाजे बंद, बच्चे घर से बाहर नहीं”

मंडोरी गांव समेत आसपास के गांवों में अब शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता है। ग्रामीण कहते हैं –
“बच्चों को बाहर निकालने की हिम्मत नहीं होती। स्कूल भी जाने में डर लगने लगा है।”
गांववालों ने मांग की है कि तेंदुए को पकड़कर या मार गिराकर गांव में शांति बहाल की जाए। वरना वे आंदोलन करेंगे।

अब तक की बड़ी बातें

पिछले 25 दिनों में 2 बच्चों की जान ले चुका तेंदुआ।

4 सालों में बिजनौर और आसपास के इलाकों में 29 लोगों की मौत।

वन विभाग पर लापरवाही और देरी से कार्रवाई के आरोप।

अब पिंजरे और गश्त – लेकिन ग्रामीणों को अब भी डर।

यह सिर्फ एक खबर नहीं, यह चेतावनी है कि प्रशासन की लापरवाही की कीमत मासूम जानें चुका रही हैं।
अगर वन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन त्वरित कार्रवाई नहीं करते, तो न जाने कितनी कनिकाएं इस खूंखार मौत का शिकार बनेंगी।

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