BANDA NEWS: जिलाधिकारी ने खबर का लिया संज्ञान, मरौली बालू खदान खंड 5 पहुंची जांच टीम 

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BANDA NEWS: खदान माफिया दिखा रहे धन की शक्ति, रौंदे रहे किसान का खेत

लखनऊ की टीम की भी हुई इंट्री

किसान को अभी तक नहीं मिला न्याय

जांच टीम के पहुंचने की खदान संचालकों को पहले ही मिल गई थी सूचना

जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने एक बार फिर खबर का संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई के आदेश दे कर बालू माफियाओं को चेता दिया है की अगर अवैध खनन की खबर मिली तो उनकी खैर नहीं। वह पहले भी अवैध खनन के खिलाफ खड़ी थीं और आज भी खड़ी हैं। पर अन्य जिम्मेदार अधिकारी लीपा पोती कर अवैध खनन को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

आपको बता दे की बीते दिनों बांदा के मटौन्ध थाना अंतर्गत मरौली गांव का एक किसान जिलाधिकारी कार्यालय शिकायत लेकर आया की बीते वर्ष से मरौली बालू खदान खंड संख्या 5 के संचालक उसका खेत बिना अनुमति के रौंद रहे हैं जिससे वह खेती नहीं कर पा रहा है विरोध करने पर वह लोग धमकी देते है खदान के मालिक संजू गुप्ता से भी बात की पर कोई हल नहीं निकला उसने यह भी बताया की वहां अवैध खनन भी होता है एक बार कार्रवाई भी हो चुकी है। जहां कई ट्रक भी अवैध पकड़े गए थे जिन्हे सीज किया गया था इसके बाद हमारी टीम ने मौके पर जाकर गुप्त रूप से हकीकत परखी। खदान में कई प्रतिबंधित हैवी मशीनें एक साथ खनन करते मिली जिनकी सैटेलाइट तस्वीरें भी खींची गई

BANDA NEWS: जिलाधिकारी ने खबर का लिया संज्ञान, मरौली बालू खदान खंड 5 पहुंची जांच टीम किसान की वह जमीन भी देखी जिसे खदान संचालक रौंद रहे हैं। जिसकी खबर हमने प्रमुखता से चलाई जिसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने त्वरित जांच के आदेश दिए। जांच करने खनिज इंस्पेक्टर और तहसीलदार खदान पहुंचे लेकिन खदान संचालकों को पहले ही अधिकारियों के आने की सूचना मिल गई और आनन फानन में मसीने खनन क्षेत्र से हटा दी गईं और ट्रक भी गायब करा दिए गए। जिसके कारण जांच टीम को वहां कुछ नहीं मिला न ही ओवरलोड ट्रक और न ही खनन करती मशीनें।

इसी मामले में हमने तहसीलदार से मिलकर जानकारी ली तो उन्होंने बताया की मौके पर न ही ट्रक थे और न ही खनन करती हुई मशीनें थी खनन कार्य बंद पड़ा हुआ था और अवैध खनन हुआ है या नहीं यह तो खनिज इंस्पेक्टर की रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा वही तहसीलदार साहब ने लखनऊ से आई जांच टीम का भी जिक्र किया जो बीते दिन बांदा आई थी। इसके बाद हमने खनिज इंस्पेक्टर से भी जानकारी लेनी चाही पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। पर जानकारी के अनुसार खनिज इंस्पेक्टर ने भी अपनी रिपोर्ट में क्लीन चिट दे दी है।

जिम्मेदारों पर खड़े हुए सवालिया निशान

अब सवाल यह उठता है की जब सरकार ने खदानों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य किए हैं तो अधिकारी उन सीसीटीवी फुटेज की जांच क्यों नही करती है। क्या कैमरे सो पीस के लिए लगाए गए हैं। जहां एक साथ कई प्रतिबंधित मशीनें खनन कर रहीं हो वहां अवैध खनन कैसे नहीं पाया गया क्या खनिज इंस्पेक्टर लीपापोती कर रहे हैं। सवाल यह भी खड़ा होता है की जांच टीम ने उस किसान से संपर्क क्यों नहीं किया जिसने खदान संचालकों पर कई आरोप लगाए हैं।

हालाकि तहसीलदार ने गुप्त रूप से छापेमारी कर कार्रवाई करने की बात कही है।

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