Banda News: बांदा में लूट, हत्या, गुंडई और अवैध खनन के आरोपी बरियारी खदान के आताताइयों को प्रशासन की क्लीन चिट

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उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बालू माफियाओं के सामने मानो जिला प्रशासन ने अपना सब कुछ गिरवी रख दिया हो और राम राज्य की दुहाई देने वाली योगी सरकार को रावण राज बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। जनपद बांदा की बरियारी बालू खदान संजू गुप्ता की है जिसने खदान की कमान शैलेंद्र यादव नाम के गुंडे को सौंप रखी है। जिसने इलाके में आतंक मचा रखा है। यह वही गुंडा है जिसने खदान मालिक संजू गुप्ता के इशारे में खबर करने गए पत्रकारों के साथ लूट की पर पुलिस ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की जांच की बात कहकर आज भी मामला लटकाए हुए है फिर ग्रामीणों और मजदूरों को धमकाया साथ ही मजदूरों की मजदूरी नहीं दी जब मजदूरों ने जिला प्रशासन से शिकायत की तो इसने मजदूरों से समझौता तो कर लिया लेकिन उन्हें सबक सिखाने के लिए षण्यंत्र के तहत खदान में काम कर रहे मजदूर को खाना देने आए किशोर बेटे को ट्रक के नीचे दबवा कर मार डाला और हादसे का नाम दे दिया गया ग्रामीणों के बवाल करने पर प्रशासन ने लाश की बोली लगवा कर मामला हादसा करार दे दिया और ट्रक ड्राइवर पर कार्रवाई कर सब रफा दफा कर दिया गया इतना ही नहीं हाल ही में एक और ग्रामीण जिलाधिकारी की चौखट में न्याय मांगने आया था जिसने बताया था की खदान के गुंडे जबरन उसकी जमीन में रास्ता बनाए हुए है और भारी भरकम ट्रक निकाल रहे है रोकने पर धमकी देते है । पर इसके बावजूद कोई कार्रवाई की बात सामने नहीं आई वहीं एक बार फिर खदान संचालकों पर अवैध खनन करने और गुंडई करने का आरोप लगा है पर प्रशासन ने एक बार फिर क्लीन चिट दे दी वहीं खनन करने वाली मशीनें नदी किनारे खड़ी देख कर भी मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने आंखों में पट्टी बांध ली और बिना कार्रवाई के लौट आए।

आपको बता दे जिलाधिकारी कार्यालय शिकायत लेकर आए अरुण कुमार ने बताया की बरियारी खदान के बगल से कोलावल रायपुर बालू खदान का पट्टा है जहां बरियारी बालू खदान के गुंडे घुस कर उनके खंड में पोकलैंड मशीनों से अवैध खनन कर रहे है इतना ही नहीं वह लोग नदी की जलधारा से करीब 15 फुट गहराई तक खनन कर जानलेवा गड्ढे बना रहे हैं बार बार मना करने पर नहीं मान रहे है और लड़ने पर उतारू हैं ये लोग लगातार अवैध खनन कर रहे हैं। जिसके बाद जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए खनिज इंस्पेक्टर गौरव को भेजा जहां उन्होंने सीमांकन कर क्लीन चिट दे दी उन्हें न ही अवैध खनन दिखा और न ही नदी किनारे खड़ी अवैध पोकलैंड मशीनें दिखीं।

अब यह सवाल उठना तो लाजमी है की क्या इन अधिकारियों ने ईमान धर्म कर्म सबकुछ बालू माफियाओं के चरणों में अर्पित कर दिया है और बदले में एसो आराम का वरदान ले लिया है। शायद यही वजह है की खदान मालिक संजू गुप्ता जिले में घूम घूम कर सबसे कहता फिर रहा है की मैंने जिले के अधिकारियों को कौड़ियों के दाम खरीद रखा है मेरा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता। अगर यही हाल रहा तो अब बांदा को राम ही बचाए।

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