आखिर फिर से देखा गया “खुफिया बंदर” – हंसते-हंसते हो जाओगे “लोटपोट” – “सावधान” रहने की है जरुरत

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रिपोर्ट – शिवा शर्मा – कानपुर नगर 
 

Kanpur News – साथियों वैसे तो आपने मंकी किंग यानी बंदरों की हंसाने और लोटपोट करने वाली ढेर सारे किस्से सुने और देखें जरूर होंगे। लेकिन आज हम एक ऐसे नटखट बंदरों के विषय में बताने जा रहे हैं, जिन्हे ख़ुफ़िया जानकारी की भनक चंद सेकंडों में लग जाती है और वह उन रहस्यों का पर्दाफाश कर देते हैं, जिन्हे कोई नहीं जनता और जाने भी क्यों क्योंकि छुपाने वाले ने बड़ी ही गोपनीयता से जो सुरक्षित किया था। लेकिन ख़ुफ़िया अंदाज रखने वाले बंदरों से कुछ नहीं छुपता है और वह उसे अपने गुडवर्क की तरह करके लोगों को अपने प्रति आकर्षित करके कुछ समय का मनोरंजन करने में पीछे नहीं हटते। 

 
अठखेलियां खेलती है बंदरों की टोली

 
कानपुर का कमिश्नर ऑफ़ पुलिस का कार्यालय। जहां सुबह से ही इंसानों की चहल कदमी शुरू हो जाती है। खाकी वर्दी में पुलिस कर्मचारी अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं तो पुलिस विभाग से सम्बंधित लोगों का आवागमन यहां की चहल कदमी को बढ़ाता रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इस कार्यालय में आने वालों को सिर्फ डर बना रहता है तो दर्जनों की संख्या में डेरा जमाए बंदरों से। क्योंकि यहां के बंदर न जाने कितने लोगों के वाहनों को नुकसान पहुंचा चुके हैं जाने कितनों को अपनी नटखट अदाओं से हसाते-हसाते लोटपोट कर चुके हैं। वहीं एक खास बात यह भी है कि इन बंदरों में एक खास बात यह है कि यह किसी इंसान के शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। 

 
आखिर मिल गया ख़ुफ़िया अंदाज वाला बंदर 
 
साथियों हम जिस लिए पुलिस कार्यालय के बंदरों की चर्चा कर रहे हैं वो इसलिए खास है कि इन बंदरों के बीच एक ख़ुफ़िया अंदाज रखने वाला एक बंदर भी है। जिसने अभी तक न जाने कितने लोगों की पोल खोलकर रख दी है। कुछ ऐसा ही नजारा उस वक्त देखने को मिला जब व्यस्तता के बीच एक बंदर उछल कून्द मचाते हुए वाहन स्टैंड पर पहुंच गया। कुछ देर तो ऐसा लग रहा था कि वो कुछ सोच रहा होगा। मानो उसे कुछ तलाश है। तभी कुछ देर में वही ख़ुफ़िया बंदर एक मोटरसाइकिल पर जा बैठा और देखते ही देखते बाइक में लगे बैग की तलाशी लेने लगा वो भी इस तरह से कि जैसे सघन चेकिंग की जाती हो। बंदर की इस हरकत को मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया गया जो इस वक्त चर्चा का विषय बना हुआ है। 
 
ख़ुफ़िया बंदर ने खोजी थी शराब 
 
अभी हाल ही में बीते 02 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन बंदरों की टोली में छुपे ख़ुफ़िया अंदाज रखने वाले बंदर सिपाही की गाड़ी से शराब की बोतल निकालकर लोगों को अचम्भे में दाल दिया था और कई घंटे तक बंदर की अठखेलियां लोगों के मनोरंजन का साधन बानी रही थी। इस लिए आप भी जब जाएँ तो कुछ ऐसा न करें कि खुफिया बंदर सबके सामने आपका राज खोल दे। 

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