आगरा: विशेष सचिव का नकली और अवैध दवाओं पर बड़ा खुलासा, करोड़ों की दवाएं सीज

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आगरा में नकली और अवैध दवाइयों के कारोबार का काला सच सामने आया है। दवा माफियाओं के खिलाफ लगातार चल रही छापेमारी ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। करोड़ों की दवाइयाँ सीज की गई हैं और कई आरोपी सलाखों के पीछे भेजे गए हैं। इस मामले ने यह साफ कर दिया है कि नकली दवाओं का धंधा संगठित गिरोह बनाकर किया जा रहा था, जो न सिर्फ लोगों की जान से खेल रहा था, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बड़ा खतरा बन चुका था।

छापेमारी और खुलासा

23 अगस्त से शुरू हुई छापेमारी अभी तक जारी है। ड्रग विभाग की विशेष टीमों ने आगरा सहित कई जिलों में छापेमारी की। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि बड़े स्तर पर नकली और अवैध दवाइयों की सप्लाई की जा रही थी।

छापेमारी में हे मां मेडिकल से लगभग 60 करोड़ की दवाएं सीज की गईं, वहीं राधे मेडिकल एजेंसी के गोदाम से करीब 10 करोड़ की दवाइयाँ जब्त हुईं।

डमी फर्मों का जाल

दवा माफियाओं ने नकली कारोबार को अंजाम देने के लिए डमी फर्में बनाई थीं। जांच में सामने आया कि 5 महाराष्ट्र की और 3 आगरा में फर्जी फर्में खड़ी की गईं, जिनके जरिए दवाओं की खरीद-फरोख्त की जाती थी।

असली कंपनियों के बॉक्स मंगवाकर उन्हीं की तरह दिखने वाली नकली दवाइयाँ तैयार की जाती थीं। यही नहीं, सप्लाई चेन इतनी मजबूत बना दी गई थी कि उपभोक्ता असली और नकली में फर्क नहीं कर पा रहे थे।

पांडिचेरी से जुड़ा है कनेक्शन

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि नकली दवाओं की फैक्ट्री पांडिचेरी में चलाई जा रही थी। ड्रग विभाग की टीमों ने वहां भी छापेमारी की, लेकिन फैक्ट्री मालिक फैक्ट्री बंद करके फरार हो गया। यह नेटवर्क सिर्फ आगरा तक ही सीमित नहीं था, बल्कि लखनऊ, बरेली, कानपुर, मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ तक फैला हुआ था।

 मुकदमे और आरोपियों पर कार्रवाई

ड्रग विभाग ने अब तक इस मामले में 4 मुकदमे दर्ज कराए हैं। इनमें से तीन मुकदमे कोतवाली क्षेत्र में और एक मुकदमा अन्य थाने में दर्ज हुआ।

इस गोरखधंधे में शामिल आरोपियों की पहचान युनुस, वारिस, विक्की कुमार, सुभाष कुमार, हिमांशु अग्रवाल और फरहान के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

छापेमारी के दौरान एक चौंकाने वाली घटना यह भी सामने आई कि हे मां मेडिकल का मालिक हिमांशु अग्रवाल ने अधिकारियों को कार्रवाई रोकने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की पेशकश की, लेकिन विभाग ने इसे सिरे से खारिज कर दिया और कार्रवाई जारी रखी।

सख्त निगरानी जारी

ड्रग विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई यहीं खत्म नहीं होगी। कई और गोदामों और मेडिकल स्टोर्स पर भी विभाग की नजर है। नकली दवाओं का कारोबार करने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

 विशेष सचिव का बयान

विशेष सचिव रेखा एस. चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में  सीधे कहा

“नकली और अवैध दवाओं का यह खेल जनता की जान से खिलवाड़ है। हमने अब तक करोड़ों की दवाएं जब्त की हैं और कई मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। जांच प्रदेश से बाहर तक फैलाई गई है। यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म करने तक हमारी कार्रवाई जारी रहेगी।”

यह पूरा मामला केवल आगरा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे के लिए खतरे की घंटी है। नकली दवाएं सीधे-सीधे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हैं। प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब इस तरह के माफियाओं को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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