पढ़िए CM Yogi में बढ़ा सिख गौरव: ‘साहिबजादा दिवस’ से लेकर ‘पंच तख्त यात्रा योजना’ तक नई पहचान

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लखनऊ/गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने सिख परंपरा के सम्मान और उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। रविवार को गोरखपुर के पैडलेगंज स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में मुख्यमंत्री ने सिख गुरुओं के शौर्य, पराक्रम और बलिदान को स्मरण किया। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा भवन के नए स्वरूप और सुविधाओं के विस्तार कार्यों का भी शुभारंभ किया।

सीएम योगी ने बताया सनातन का हिस्सा 

बीते साढ़े आठ वर्षों में योगी सरकार ने न केवल सिख समुदाय की उपेक्षित धरोहर को पुनर्जीवित किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि सिख परंपरा सनातन संस्कृति की उस महान धारा का हिस्सा है जिसमें धर्म रक्षा और बलिदान सर्वोपरि है। इससे पहले की सरकारों में जहां सिख गुरुओं के बलिदान को पाठ्यक्रमों और सार्वजनिक जीवन में स्थान नहीं मिला, वहीं मुख्यमंत्री योगी ने इसे नई पहचान दी।

सिख गुरुओं के इतिहास को पढाई में किया जायेगा शामिल 

दिसंबर 2020 में उनकी पहल पर पहली बार सिख गुरुओं के गौरवशाली इतिहास को उत्तर प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। इसके अलावा राजधानी लखनऊ के आलमबाग में “खालसा चौक” का उद्घाटन कर सिख परंपरा का गौरव स्थापित किया गया। इसी कड़ी में “साहिबजादा दिवस” को सरकारी मान्यता देकर गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को राष्ट्रीय प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया गया।

पंच तख्त यात्रा योजना की शुरुआत

इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “पंच तख्त यात्रा योजना” की शुरुआत की। इस योजना के तहत सिख श्रद्धालुओं को पंथ के पांचों प्रमुख तख्त साहिबों के दर्शन कराए जाते हैं और प्रत्येक श्रद्धालु को 10,000 तक की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है। यह पहल केवल यात्रा योजना नहीं, बल्कि सिख श्रद्धा और सनातन संस्कृति के बीच एक सशक्त सेतु का प्रतीक है।

सतत संवाद कर उन्होंने यह दिया संदेश 

मुख्यमंत्री ने कई बार स्पष्ट किया है कि सिख और नाथ परंपरा राष्ट्रभक्ति व बलिदान की साझा धारा हैं। गुरुद्वारों में जाकर शीश नवाकर और सिख प्रतिनिधिमंडलों से सतत संवाद कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि सिख गौरव, उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

निस्संदेह, यह प्रयास केवल तुष्टिकरण से परे हैं। योगी सरकार ने दिखाया है कि जब नेतृत्व में आस्था और राष्ट्रभक्ति का संकल्प होता है, तो परंपराएं न केवल जीवित रहती हैं, बल्कि नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बनती हैं। आज उत्तर प्रदेश में सिख और सनातन परंपरा को एक साझा सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जा रहा है।

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