पढ़िए माँ यशोदा की कथा: जानिए श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और वात्सल्य भरे संबंधों का अनमोल वर्णन

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हिंदू धर्म के पौराणिक ग्रंथों में माता यशोदा का स्थान अत्यंत विशेष माना गया है। उन्हें नंद की पत्नी और भगवान श्रीकृष्ण की पालनहार माता के रूप में स्मरण किया जाता है। भागवत पुराण के अनुसार, श्रीकृष्ण का जन्म देवकी के गर्भ से मथुरा कारागार में हुआ था। किंतु कंस से रक्षा करने हेतु वासुदेव ने आधी रात में उन्हें गोकुल पहुंचाया, जहां माता यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया।

जानिए पूर्व जन्म का रिश्ता 

यशोदा और नंद की जोड़ी पूर्व जन्म के वसु द्रोण और उनकी पत्नी धरा का पुनर्जन्म थी। भगवान ब्रह्मा से प्राप्त वरदान के प्रभाव से धरा का जन्म यशोदा के रूप में हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण को वात्सल्य का अद्भुत सुख प्रदान किया।

ग्रंथों में है लीलाओं का वर्णन 
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन अनेक ग्रंथों और कवियों ने किया है। सूरदास ने विशेष रूप से यशोदा द्वारा ब्रह्मांड दर्शन, माखन चोरी और ऊखल से बांधने की घटनाओं का सजीव चित्रण किया है। यशोदा ने न केवल कृष्ण का बल्कि बलराम का भी पालन-पोषण किया। उनकी एक पुत्री एकांगा का भी उल्लेख मिलता है।
इसके अतिरिक्त, पूतना वध और शकटासुर के अंत की घटनाओं में भी यशोदा की ममता और चिंता का अनोखा संगम दिखाई देता है। जब पूतना ने विष से भरे स्तनों से कृष्ण को मारने का प्रयास किया, तब भगवान ने दूध के साथ उसके प्राण भी ले लिए। इसी प्रकार, शकटासुर को भी बालक रूप में श्रीकृष्ण ने परास्त किया, जिससे ब्रजमंडल सुरक्षित रहा।

समय बीतने के साथ श्रीकृष्ण ने माखन लीला, कालिय नाग उद्धार, गोवर्धन धारण और रासलीला जैसी अनेक लीलाओं द्वारा यशोदा को अपार सुख दिया। लगभग ग्यारह वर्ष तक गोकुल में उनके महल में कान्हा की किलकारियां गूंजती रहीं।

हालांकि, जब अक्रूर उन्हें मथुरा ले जाने आया, तब यशोदा का हृदय टूट गया। उन्होंने विरोध तो छोड़ा, लेकिन आंसुओं से उनका मन भरा रहा। अंततः कुरुक्षेत्र में पुनः मिलन से उनके हृदय को शांति मिली।

इस प्रकार, यशोदा माँ की कथा केवल एक माता-पुत्र के रिश्ते की कहानी नहीं, बल्कि अटूट भक्ति, वात्सल्य और त्याग का प्रतीक है।

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