यूपी में कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ बैन, सहायक आयुक्त औषधि ने जारी किए आदेश, सभी जिलों में शुरू हुआ जांच अभियान
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य राज्य में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।
‘कोल्ड्रिफ’ सिरप पर रोक — क्यों लिया गया यह फैसला
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में विभिन्न जिलों से इस सिरप के गुणवत्ता मानकों पर सवाल उठे थे। कुछ सैंपल्स की प्रारंभिक जांच में संदिग्ध तत्व पाए जाने के बाद विभाग ने सावधानी बरतते हुए यह फैसला किया है।
सहायक आयुक्त औषधि ने आदेश में कहा है कि अब राज्य के हर जिले में Coldrif सिरप की बिक्री और स्टॉक की जांच की जाएगी। जहां कहीं यह दवा पाई जाएगी, वहां से सैंपल लेकर लखनऊ स्थित औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
अभियान की हुई शुरुआत — जिलों में सैंपल कलेक्शन जारी
आदेश के बाद आज से ही सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों की टीमें सक्रिय हो गई हैं। ये टीमें मेडिकल स्टोर, थोक विक्रेताओं और निजी क्लीनिकों से Coldrif सिरप के सैंपल एकत्र कर रही हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में सिरप मानक के अनुरूप नहीं पाया गया, तो संबंधित दवा कंपनी और वितरण चैनलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें लाइसेंस निरस्तीकरण से लेकर कानूनी कार्रवाई तक के प्रावधान हैं।
जनहित में सतर्कता — सरकार की प्राथमिकता
प्रदेश सरकार ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर औषधि विभाग समय-समय पर औषधियों की गुणवत्ता जांच और फार्मेसी निरीक्षण करता है। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बच्चों में कफ सिरप के अत्यधिक उपयोग को लेकर चिंता जताई थी। ऐसे में यह कदम सावधानी और जनहित की दृष्टि से उठाया गया है।
चिकित्सकों और दुकानदारों के लिए बड़ी चेतावनी
विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी मेडिकल स्टोर या फार्मासिस्ट Coldrif सिरप का स्टॉक न रखे और न ही इसे बेचने का प्रयास करे। यदि जांच के दौरान यह सिरप पाया गया तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। औषधि निरीक्षक इस अभियान की नियमित रिपोर्ट अपने-अपने जिलों से मुख्यालय को भेजेंगे, ताकि निगरानी व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में है बड़ा कदम
राज्य में पहले भी कुछ दवाओं की गुणवत्ता को लेकर जांचें की जा चुकी हैं, जिनमें कई उत्पाद मानक से कम गुणवत्ता वाले पाए गए थे। ऐसे मामलों के मद्देनजर यह नया अभियान सरकार की ‘सुरक्षित औषधि नीति’ का हिस्सा माना जा रहा है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाजार में केवल वही दवाएं उपलब्ध रहें जो वास्तव में सुरक्षित और प्रमाणित हों।
सभी जिलों से जुटाए गए सैंपल्स को लखनऊ स्थित राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।यहां विशेषज्ञ वैज्ञानिक Coldrif सिरप के रासायनिक संयोजन और सुरक्षा मानकों की जांच करेंगे।
जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग आगे की कार्रवाई तय करेगा। यदि सिरप में हानिकारक या अप्रमाणित तत्व पाए गए, तो इसके उत्पादन, वितरण और बिक्री पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
आमजन के लिए यह सुझाव
औषधि विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे Coldrif सिरप या इसी प्रकार के किसी संदिग्ध उत्पाद का उपयोग न करें। यदि किसी दुकान पर यह सिरप बिकता दिखाई दे, तो उसकी सूचना तत्काल **जिला औषधि नियंत्रण कार्यालय** को दें। साथ ही, बच्चों या बुजुर्गों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के कोई भी कफ सिरप देने से बचें।