UP By-election 2024 Result: भाजपा की बड़ी जीत, इन सीटों पर रचा इतिहास.. खास रणनीति से मारी बाजी

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UP By-election 2024 Result: उत्तर प्रदेश में हुए नौ सीटों के उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा की आक्रामक रणनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व क्षमता को एक बार फिर साबित किया। भाजपा ने सात सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सपा ने केवल दो सीटों पर अपनी स्थिति बनाए रखी। आइए जानते हैं इन चुनावों का विस्तृत विश्लेषण।

कौन कहां से जीता?

  1. मीरापुर: एनडीए की सहयोगी पार्टी रालोद से मिथलेश पाल ने 30,426 वोटों से जीत दर्ज की।
  2. खैर: भाजपा के सुरेंद्र दिलेर ने 38,503 वोटों के बड़े अंतर से विजय पाई।
  3. गाजियाबाद: भाजपा प्रत्याशी संजीव शर्मा ने 70,600 वोटों से ऐतिहासिक जीत हासिल की।
  4. कुंदरकी: भाजपा ने 32 साल बाद यह सीट अपने नाम की।
  5. कटेहरी: भाजपा के धर्मराज निषाद ने 30,000 मतों से जीत दर्ज की।
  6. मझवां: भाजपा की सुचिस्मिता मौर्य ने 4,922 वोटों से सपा की डॉ. ज्योति बिंद को हराया।
  7. फूलपुर: भाजपा के दीपक पटेल ने जीत हासिल की।
  8. करहल: सपा के तेज प्रताप यादव ने 1,04,207 वोटों के साथ भाजपा को 14,704 वोटों से हराया।
  9. सीसामऊ: सपा की नसीम सोलंकी ने 8,564 मतों से जीत दर्ज की।

भाजपा की जीत के कारण:

  • आक्रामक रणनीति: भाजपा ने इस बार लोकसभा चुनावों के विपरीत अति आत्मविश्वास से बचते हुए हर सीट पर विशिष्ट रणनीति अपनाई।
  • “बटेंगे तो कटेंगे” का असर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह नारा जनता के बीच काफी प्रभावी रहा। धार्मिक एकजुटता और सामाजिक समरसता के मुद्दे पर भाजपा ने मजबूती से अपनी स्थिति बनाई।
  • सोशल इंजीनियरिंग: भाजपा ने उम्मीदवारों का चयन जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया। दलित और ओबीसी वर्ग, जो लोकसभा चुनावों में छिटक गया था, इस बार भाजपा के साथ खड़ा दिखा।

हार के बाद सपा नेताओं की प्रतिक्रिया:

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
इलेक्शन को करप्शन का पर्याय बनाने वालों के हथकंडे दुनिया के सामने उजागर हो चुके हैं। अब असली संघर्ष शुरू हुआ है।

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सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा,
कठिन परिस्थितियों में भी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया। हमें इस बात पर विचार करना होगा कि नतीजे हमारी अपेक्षा से अलग क्यों आए।

निष्कर्ष:

भाजपा ने उपचुनावों में न केवल अपनी रणनीतिक बढ़त को साबित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि उसके “डबल इंजन सरकार” के नारे को जनसमर्थन मिला है। सपा के लिए यह हार आत्ममंथन का समय है, जबकि भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।

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