Trump Tariff Decision: ट्रंप को तगड़ा झटका! US कोर्ट ने टैरिफ को ठहराया गैरकानूनी
Trump Tariff Decision: ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी अपील कोर्ट ने टैरिफ को बताया अवैध, अब सुप्रीम कोर्ट में होगी अंतिम लड़ाई
अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल मचाने वाले डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर बड़ा फैसला आ गया है। अमेरिका की संघीय अपीलीय अदालत ने ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकतर टैरिफ को अवैध करार दिया है। अदालत का कहना है कि राष्ट्रपति ने आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग किया है और जिस कानून का सहारा लिया गया, उसमें कहीं भी टैरिफ लगाने की शक्ति का उल्लेख नहीं है। यह फैसला ट्रंप की पूरी व्यापार नीति पर करारा प्रहार माना जा रहा है। हालांकि अदालत ने इन टैरिफ को तुरंत खत्म करने के बजाय 14 अक्टूबर 2025 तक लागू रहने की अनुमति दी है, ताकि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके। इस फैसले के बाद अमेरिकी राजनीति और आर्थिक नीति के बीच एक बड़ा टकराव सामने आ गया है।
Trump Tariff Decision: टैरिफ की पृष्ठभूमि और ट्रंप का कदम
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ को विदेश नीति का सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने बार-बार यह दलील दी कि इन टैरिफ से अमेरिका अपने व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बना सकता है और बेहतर समझौते कर सकता है। खासतौर पर अप्रैल 2025 में “रिसिप्रोकल टैरिफ” और फरवरी 2025 में चीन, कनाडा और मेक्सिको पर टैरिफ लगाए गए। इन टैरिफ को उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल कानून—International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लागू किया था। उनका तर्क था कि ये कदम अमेरिकी नौकरियों और उद्योगों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं।
Trump Tariff Decision: अदालत का तर्क और फैसला
अपीलीय अदालत ने स्पष्ट कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को कई आपातकालीन कदम उठाने की शक्ति देता है, लेकिन इसमें कहीं भी टैरिफ या कर लगाने की शक्ति का उल्लेख नहीं है। अदालत का मानना है कि राष्ट्रपति ने इस कानून की सीमा से आगे बढ़कर इसका उपयोग किया और यह शक्तियों का दुरुपयोग है।
फैसला 7-4 के बहुमत से सुनाया गया और इसमें कहा गया कि विधायिका यदि किसी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार देना चाहती है, तो उसे कानून में स्पष्ट शब्दों में लिखना होगा। चूंकि IEEPA में ऐसा नहीं है, इसलिए राष्ट्रपति की कार्रवाई असंवैधानिक और गैरकानूनी है।
Trump Tariff Decision: ट्रंप की नाराजगी और बयान
इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप गुस्से में आ गए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि अदालत का यह फैसला “अत्यधिक पक्षपाती” है। उन्होंने कहा कि अगर ये टैरिफ हटा दिए गए तो यह देश के लिए “पूरी तरह विनाशकारी” होगा। ट्रंप ने भरोसा जताया कि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को पलटेगा और टैरिफ को बहाल रखेगा।
प्रशासन की रणनीति
अमेरिकी प्रशासन ने अदालत से राहत मांगते हुए कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील का मौका दिया जाए। अदालत ने इस अपील को स्वीकार किया और 14 अक्टूबर तक टैरिफ को लागू रहने की छूट दे दी। इसका मतलब है कि इस तारीख तक ट्रंप प्रशासन सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। अब पूरी नजर इस बात पर होगी कि सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाता है और क्या ट्रंप की नीति को कानूनी सुरक्षा मिल पाएगी।
राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव
यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए केवल कानूनी झटका नहीं है, बल्कि इसकी राजनीतिक और आर्थिक गूंज भी गहरी है। टैरिफ की वजह से अमेरिका के कई देशों से रिश्ते तनावपूर्ण हुए थे और वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता भी बढ़ी थी। दूसरी ओर, इन टैरिफ से अमेरिकी उद्योगों को कुछ हद तक राहत भी मिली थी। लेकिन अब अदालत का यह निर्णय अमेरिकी राजनीति में शक्ति संतुलन का बड़ा उदाहरण बन गया है।
यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि राष्ट्रपति किस हद तक आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं और किन मुद्दों पर उनका दायरा सीमित है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और अन्य आर्थिक नीतियों को लेकर भी कानूनी चुनौतियां बढ़ने की आशंका है।
ट्रंप को अपीलीय अदालत से करारा झटका मिला है। अदालत ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति कानून से ऊपर नहीं हैं और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल सीमित दायरे में ही किया जा सकता है। अब अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के हाथ में है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने भी यही रुख अपनाया तो ट्रंप की पूरी आर्थिक और विदेश नीति गहरे संकट में आ सकती है। वहीं अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में गया तो यह उनके लिए बड़ी जीत होगी। फिलहाल, अमेरिका और पूरी दुनिया की निगाहें इस ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई के अगले चरण पर टिकी हैं।