पाकिस्तान जेल में 4 साल: वापसी पर पत्नी से मिलन, देखने वाले भी रो पड़े
पाकिस्तान जेल में 4 साल: जेल में रहने के बाद उन्नाव का सूरजपाल घर लौटा। जब पति -पत्नी से गले मिले , भावुक नज़ारा देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। पढ़िए चार साल की जुदाई के बाद पति की घर वापसी की कहानी
कभी-कभी ज़िंदगी ऐसी पटकथा लिख देती है, जिसे पढ़कर लगता है मानो यह किसी फिल्म का दृश्य हो। उन्नाव जिले के अक्रमपुर सुलतानखेड़ा वार्ड नंबर 48 का सूरजपाल और उसकी पत्नी सुरजा देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। चार साल की लम्बी जुदाई, अनगिनत दर्द और उम्मीद की बुझती लौ के बीच जब आखिरकार बिछड़े पलों का मिलन हुआ, तो घर की चौखट पर आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
पाकिस्तान जेल में 4 साल:जुदाई की शुरुआत
सूरजपाल (45) पिछले कई वर्षों से मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे। परिवार इस तकलीफ़ का बोझ ढोते हुए भी उनके लौट आने की उम्मीद लगाए बैठा रहता था। पहले वह अक्सर घर से निकल जाते और एक-दो दिन बाद लौट आते। लेकिन साल 2020 की एक शाम वह निकले और फिर लौटकर न आए। परिजनों ने हर जगह खोजा—गांव, जिले, पड़ोसी जिले तक, लेकिन कोई निशान नहीं मिला।
जैसे-जैसे दिन महीनों और महीने सालों में बदलते गए, परिवार की उम्मीदें टूटने लगीं। सबसे बड़ा सदमा उस वक्त लगा जब पिता उमाशंकर का सूरजपाल की गुमशुदगी के कुछ ही महीने बाद निधन हो गया। अब पत्नी सुरजा देवी और बेटा पिंटू अकेले संघर्ष की डगर पर रह गए।
पाकिस्तान जेल में 4 साल:टूटती उम्मीदें, तानों की चोट
सुरजा देवी ने पति की तलाश में हर दरवाज़ा खटखटाया। कभी थानों में गुहार लगाई, कभी रिश्तेदारों के पास गईं, यहां तक कि वह वाघा बॉर्डर तक भी चली गईं—शायद वहां कोई सुराग मिल जाए। लेकिन लौटकर आईं तो सिर्फ निराशा और लोगों के ताने। मोहल्ले वाले कहते—“अब वो लौटने वाला नहीं।” फिर भी, उनके भीतर कहीं न कहीं उम्मीद की एक लौ जलती रही।
पाकिस्तान जेल में 4 साल:पाकिस्तान से आई अप्रत्याशित खबर
करीब तीन साल बाद, जून 2024 में अचानक एक दिन चुप्पी टूटी। पाकिस्तान दूतावास से भारतीय उच्चायोग को पत्र मिला—लाहौर जेल में एक भारतीय कैदी बंद है, नाम है सूरजपाल। यह खबर सुनते ही परिवार के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। जिसे मृत मान लिया गया था, वह जीवित निकला—लेकिन पड़ोसी मुल्क की जेल की सलाखों के पीछे।
भारतीय प्रशासन ने तुरंत पहचान की पुष्टि कराई। सबूत मिले कि यह वही सूरजपाल है, जो मानसिक बीमारी की वजह से कई बार लापता होता रहा।
पाकिस्तान जेल में 4 साल:वापसी की दास्तान
कानूनी और राजनयिक प्रक्रिया पूरी करने में महीनों लग गए। और फिर एक शाम—जैसे किसी सपने की तरह—सूरजपाल अचानक लोक नगर क्रॉसिंग पर दिखाई दिए। चचेरे भाइयों ने पहचान कर घर पहुँचाया।
जब वे दरवाज़े से भीतर आए, तो पत्नी सुरजा देवी और बेटे पिंटू ने उन्हें गले लगाया। चार साल का ज्वार थामे हुए आंखों से आंसुओं की धार बह निकली। उस पल में किसी शब्द की ज़रूरत नहीं थी—सिर्फ सिसकियों और सुकून भरे आलिंगन ने सब कह दिया।
पाकिस्तान जेल में 4 साल:भावनाओं का सैलाब
सुरजा देवी ने रोते हुए कहा—
“मैंने हर मंदिर में माथा टेका, हर दरवाज़े पर दस्तक दी। लोग ताने मारते थे, कहते अब कभी नहीं लौटेगा। पर आज भगवान ने मेरी सुन ली।”
सूरजपाल अब भी पूरी तरह मानसिक रूप से स्थिर नहीं हैं। बातचीत में कई बार भटक जाते हैं। उन्होंने इतना ही बताया कि वह ट्रेन से चंडीगढ़ पहुंचे और समझ ही नहीं पाए कि कब पाकिस्तान की सीमा में चले गए।
मोहल्ले में खुशी और आंसू
सूरजपाल की वापसी से पूरा मोहल्ला भावुक हो उठा। बुजुर्ग रामप्रकाश ने कहा—
“यह किसी चमत्कार से कम नहीं। चार साल बाद किसी का यूं लौट आना भगवान की ही मर्जी है।”
अब पत्नी और बेटे की एक ही ख्वाहिश है—कि सूरजपाल का इलाज हो और वे फिर से सामान्य जीवन जी सकें।
यह कहानी सिर्फ़ सूरजपाल और उनके परिवार की नहीं, बल्कि उन असंख्य रिश्तों की है जो जुदाई के अंधेरों में भी उम्मीद का दिया जलाए रखते हैं। पाकिस्तान की जेल से घर तक का सफर लंबा और पीड़ादायक था, मगर जब मिलन हुआ तो वह पल किसी सपने, किसी फ़िल्मी दृश्य और किसी चमत्कार से कम नहीं था।
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