सपा सांसद का फर्जी फेसबुक अकाउंट या असली पोस्ट? Yogi Adityanath पर अभद्र टिप्पणी से बवाल
शामली-कैराना से सपा सांसद इकरा हसन के फेसबुक अकाउंट से विवादित वीडियो, Yogi Adityanath पर अभद्र पोस्ट से सनसनी
कैराना: राजनीति के गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के नाम से बनाए गए फेसबुक अकाउंट से विवादित वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर आग लगी हुई है। वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक सामग्री दिखाई गई है, जिसने राजनीतिक और सांप्रदायिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि मामला तब सामने आया है जब इकरा हसन हाल ही में माता वैष्णो देवी के लिए शामली से सीधी ट्रेन की मांग को लेकर सुर्खियों में थीं।
वीडियो में क्या दिखा
विवादित वीडियो में दो प्रमुख क्लिप शामिल हैं। पहली क्लिप में योगी आदित्यनाथ का भाषण दिखाया गया है, जिस पर ‘दंगाई गुरु’ लिखा गया है। वहीं दूसरी क्लिप में धर्मगुरु प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचन को दिखाया गया है। वीडियो में भद्दे और आपत्तिजनक कमेंट्स भी शामिल हैं, जो राजनीतिक और धार्मिक माहौल को भड़का सकते हैं। सोशल मीडिया पर अब तक इस वीडियो को लगभग 14,000 लोग देख चुके हैं, और कमेंट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
फर्जी अकाउंट या वास्तविक अकाउंट?
सवाल उठता है कि यह फेसबुक अकाउंट वास्तव में सांसद इकरा हसन का है या किसी ने उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर यह पोस्ट डाली है। यह जांच का विषय है। सांसद इकरा हसन पहले भी इस तरह के मामलों में सतर्क रही हैं। जनवरी 2025 में सांसद ने संसद मार्ग स्थित डीसीपी को शिकायती पत्र देकर फर्जी अकाउंट्स की जानकारी दी थी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि उनके नाम से कई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए हैं और उन पर फोटो और वीडियो का इस्तेमाल कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है।
सांसद का बयान और सोशल मीडिया की चुनौती
इकरा हसन ने पहले भी कहा था कि उनके नाम से बनाए गए फर्जी अकाउंट्स न केवल उनके राजनीतिक करियर पर असर डालते हैं बल्कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचाते हैं। बावजूद इसके, उनके नाम से अभी भी कई अकाउंट सक्रिय हैं और उस पर वीडियो पोस्ट होती रहती हैं। यह मामला यह दर्शाता है कि सोशल मीडिया पर फर्जीवाड़ा और राजनीतिक साजिश कितनी तेजी से फैल सकती है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चा जोर पकड़ चुकी है। अगर इस वीडियो का असर स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर फैलता है, तो यह सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल इस तरह की सामग्री न केवल सांसद की छवि पर असर डालती है बल्कि आम जनता के मन में भ्रम और बहस भी पैदा करती है।
कैराना के इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर खतरनाक साबित हो सकता है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और साइबर सेल इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कार्रवाई करेंगे, और फर्जी अकाउंट्स को रोकने के लिए कदम उठाएंगे।