RSS पर बैन की मांग, मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान ने खड़ा कर दिया विवाद

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RSS पर बैन की मांग, मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान ने खड़ा कर दिया विवाद

 मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान: RSS पर बैन की मांग, कांग्रेस ने खोला पुराना विवाद

नई दिल्ली। सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती पर आज राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा पर जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर बैन लगाया जाना चाहिए। खड़गे ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुलकर कहा कि यदि पीएम और गृह मंत्री अमित शाह सचमुच सरदार पटेल के विचारों का सम्मान करते हैं, तो RSS जैसी हिंसात्मक और देश के अस्तित्व पर खतरा डालने वाली संगठन पर प्रतिबंध लागू किया जाना चाहिए।

“सरदार पटेल की जयंती पर पुराना विवाद एक बार फिर गरमाया! खड़गे ने RSS पर बैन की मांग कर पीएम मोदी और भाजपा पर साधा निशाना। कांग्रेस की दलील – कानून-व्यवस्था और देश की सुरक्षा खतरे में।”

खड़गे का बयान, RSS पर बैन जरूरी

कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा, “यह मेरा व्यक्तिगत विचार है और मैं इसे खुलकर रखता हूँ – RSS पर प्रतिबंध लगना चाहिए। देश में भाजपा-RSS के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति दुरूह हो गई है। अगर सरकार सच में सरदार पटेल के विचारों का सम्मान करती है, तो इसे तत्काल लागू करना चाहिए।”

खड़गे ने ऐतिहासिक साक्ष्यों का हवाला भी दिया। उन्होंने 18 जुलाई 1948 के एक पत्र का जिक्र किया, जिसमें पटेल ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखा था कि RSS की गतिविधियों के कारण महात्मा गांधी की हत्या हुई।

पीएम मोदी के बयान के बाद खड़गे का पलटवार

दरअसल, खड़गे की यह टिप्पणी पीएम मोदी के सरदार पटेल की जयंती पर गुजरात में दिए गए बयान के कुछ दिनों बाद आई। मोदी ने कहा था कि पटेल पूरे कश्मीर को भारत में शामिल करना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ऐसा नहीं होने दिया। मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश में “गुलाम मानसिकता” छोड़ी और कानून-व्यवस्था की गलत नीतियों के कारण देश दशकों तक प्रभावित रहा।

खड़गे ने कहा, “भाजपा ने नेहरू और पटेल के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की, जबकि दोनों एक-दूसरे की तारीफ करते थे। नेहरू ने भारत की एकता को आकार देने के लिए पटेल की सराहना की, और पटेल ने नेहरू को देश के लिए आदर्श बताया। भाजपा का यह दृष्टिकोण इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है।”

इतिहास के पन्नों में RSS पर बैन

30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद पटेल ने तत्काल RSS पर बैन लगाया।

पटेल ने कहा था कि गांधी की हत्या के पीछे RSS और हिंदू महासभा की गतिविधियाँ जिम्मेदार हैं और यह देश के अस्तित्व के लिए खतरा थी।

4 फरवरी 1948 को RSS पर प्रतिबंध लागू हुआ, लेकिन 11 जुलाई 1949 को संविधान और अहिंसात्मक गतिविधियों का आश्वासन मिलने के बाद बैन हटा लिया गया।

खड़गे ने इस ऐतिहासिक उदाहरण को सामने रखते हुए कहा कि यदि सरकार सचमुच कानून-व्यवस्था और देश की सुरक्षा के प्रति गंभीर है, तो उन्हें आज ही इस संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करनी चाहिए।

पटेल का योगदान और देश के लिए आदर्श

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड में हुआ। बारडोली सत्याग्रह (1928) में उनके नेतृत्व और महिलाओं की भागीदारी के बाद उन्हें “सरदार” की उपाधि मिली। 1947 से 1950 तक भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे पटेल को “लौह पुरुष” के नाम से जाना जाता है।

खड़गे ने कहा कि आज हमें पटेल की सोच और देश की सुरक्षा के प्रति उनके विचारों को याद रखना चाहिए और भाजपा-RSS के दृष्टिकोण पर सवाल उठाना चाहिए।

सरदार पटेल की जयंती पर खड़गे का बयान न केवल एक ऐतिहासिक समीक्षा है, बल्कि यह वर्तमान राजनीति में कानून-व्यवस्था, संगठन और देश के अस्तित्व को लेकर उठाए गए गंभीर सवालों की याद दिलाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब इतिहास गवाह है, तो वर्तमान सरकार को भी इतिहास की सीख से सबक लेना चाहिए और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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