माता के नवराते: रामलला दर्शन और मंगला आरती के समय में बदलाव

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माता के नवराते: रामलला दर्शन और मंगला आरती की नई समय-सारिणी नवरात्र के प्रथम दिन से लागू हुए महत्वपूर्ण बदलाव

माता के नवराते: राम लला दरबार का काल्पनिक चित्र

माता के नवराते: रामलला दर्शन और मंगला आरती में  नवरात्र से नई व्यवस्था लागू

माता के नवराते: अयोध्या के पवित्र राम जन्मभूमि स्थल पर स्थित रामलला मंदिर में दर्शन और आरती के समय में बड़े बदलाव किए गए हैं। नवरात्र के पहले दिन से इन नई व्यवस्थाओं को लागू किया गया है, जिससे राम भक्तों को भगवान रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना का बेहतर अनुभव मिलेगा। इन बदलावों का उद्देश्य भक्तों की सुविधा और भगवान की आराधना के निर्धारित समय में समन्वय स्थापित करना है। आइए जानते हैं नए समय-सारिणी के अनुसार दर्शन और आरती की जानकारी।

माता के नवराते: मंगला आरती और भगवान के सिंगार का समय

नए बदलाव के अनुसार, मंगला आरती अब सुबह 4:30 से 4:40 बजे तक होगी। मंगला आरती भगवान रामलला के जागरण का प्रतीक है और यह दिन की पहली आरती होती है। भक्तगण इस पवित्र समय में भगवान के जागरण का साक्षात्कार कर सकते हैं।

मंगला आरती के बाद सुबह 4:40 से 6:30 बजे तक भगवान रामलला का विशेष सिंगार और अभिषेक किया जाएगा। इस समय भगवान को फूलों, वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाएगा, ताकि भक्त उन्हें भव्य रूप में देख सकें। मंदिर के पुजारी विशेष विधि से भगवान का अभिषेक करते हैं, जो भक्तों के लिए एक अद्भुत दृश्य होता है।

माता के नवराते: श्रंगार आरती और दर्शन की शुरुआत

श्रंगार आरती सुबह 6:30 बजे संपन्न की जाएगी। यह आरती भगवान रामलला के सुंदर श्रंगार के बाद की जाती है। श्रंगार आरती में भगवान के सौंदर्य और उनकी दिव्यता का गुणगान किया जाता है। भक्तों के लिए यह समय भगवान की अद्वितीय छवि का साक्षात्कार करने का होता है।

श्रंगार आरती के बाद, भक्तों के लिए भगवान के दर्शन का समय प्रारंभ होता है। सुबह 7:00 बजे से भगवान के दर्शन का समय खुलता है, जिसमें भक्तगण रामलला के भव्य रूप का दर्शन कर सकते हैं। यह समय मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ का होता है, क्योंकि सभी भक्त भगवान की आराधना और दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं।

माता के नवराते: बालभोग और भगवान के पट बंद करने का समय

सुबह 9:00 बजे भगवान रामलला के लिए बालभोग का आयोजन किया जाएगा। यह समय भगवान को भोग अर्पित करने का होता है, जिसमें उन्हें विविध प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। इस दौरान भगवान के पट 5 मिनट के लिए बंद कर दिए जाएंगे, ताकि भगवान का भोग शांतिपूर्ण वातावरण में अर्पित किया जा सके।

सुबह 9:05 बजे भगवान के पट फिर से खोल दिए जाएंगे और भक्तों को दर्शन का पुनः अवसर मिलेगा। इस समय के बाद मंदिर में दर्शन सुचारू रूप से चलते रहते हैं और भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार भगवान के दर्शन कर सकते हैं।

दोपहर की आरती और भगवान का शयन

रामलला का दर्शन भक्तों के लिए सुबह 11:45 बजे तक सुचारू रूप से चलता है। इसके बाद भगवान के पट 11:45 से 12:00 बजे तक के लिए बंद किए जाते हैं। इस समय भगवान के लिए विशेष भोग अर्पित किया जाता है। दोपहर 12:00 बजे भोग आरती का आयोजन होता है, जिसमें भगवान को दोपहर का भोग अर्पित किया जाता है।

दोपहर 12:15 बजे भगवान का शयन होता है, जो उनके विश्राम का समय होता है। इसके लिए मंदिर के पट 12:30 से 1:30 बजे तक बंद रहते हैं। यह समय भगवान के विश्राम का होता है और भक्तों को इस दौरान मंदिर में प्रवेश नहीं मिलता है।

देउठान आरती और दोपहर का दर्शन

माता के नवराते: रामलला दर्शन और मंगला आरती की नई समय-सारिणी नवरात्र के प्रथम दिन से लागू हुए महत्वपूर्ण बदलाव
माता के नवराते: राम लला दरबार का काल्पनिक चित्र

दोपहर 1:30 बजे भगवान के पट पुनः खुलते हैं और देउठान आरती का आयोजन होता है। इस आरती के बाद भक्तों के लिए दोपहर के दर्शन का समय शुरू होता है, जो शाम 4:00 बजे तक अनवरत रूप से चलता है।

शाम 4:00 बजे भगवान के पट 5 मिनट के लिए बंद किए जाते हैं, ताकि भगवान को दिन के अंतिम भोग अर्पित किए जा सकें। इसके बाद 4:05 से 6:45 तक भक्त फिर से भगवान रामलला के दर्शन कर सकते हैं। इस समय के दौरान भगवान के मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है, जो भगवान की आराधना और दर्शन के लिए आते हैं।

संध्या आरती और रात्रि का दर्शन

शाम 6:45 से 7:00 बजे तक भगवान के पट फिर से 15 मिनट के लिए बंद किए जाएंगे, इस दौरान भगवान को अंतिम भोग अर्पित किया जाएगा।

शाम 7:00 बजे संध्या आरती होगी, जिसमें भगवान रामलला के संध्या पूजन का आयोजन किया जाता है। इस आरती के बाद 7:00 से 8:30 तक पुनः भगवान के दर्शन का समय होगा। भक्त इस समय का लाभ उठाकर भगवान के पवित्र दर्शन कर सकते हैं।

रात्रि के अंतिम दर्शन और शयन आरती

रात्रि 9:00 बजे से श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया जाएगा, ताकि भगवान के भोग और शयन की प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी की जा सके। रात्रि 9:30 बजे भगवान का भोग अर्पित किया जाएगा और इसके बाद शयन आरती का आयोजन होगा।

रात्रि 9:45 बजे भगवान रामलला के शयन के लिए पट बंद कर दिए जाएंगे और इस प्रकार भक्तों के लिए दर्शन का समय समाप्त हो जाएगा।

इस नए समय-सारिणी के अनुसार, भक्तों को भगवान रामलला के दर्शन और आरती का विशेष ध्यान रखना होगा, ताकि वे बिना किसी असुविधा के भगवान के दर्शन कर सकें। नवरात्र से लागू इस नई व्यवस्था से रामलला के मंदिर में अनुशासन और श्रद्धा का संगम स्थापित किया गया है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा।

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