Swami Ramabhadracharya health: देहरादून के अस्पताल में एडमिट, ‘घबराने की जरूरत नहीं’ – डॉक्टर

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Swami Ramabhadracharya health: प्रसिद्ध संत और तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य को सीने में संक्रमण और सांस लेने में दिक्कत के चलते देहरादून के सिनर्जी हॉस्पिटल में भर्ती है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन वह डायबिटीज और हृदय रोग के मरीज हैं, जिसके चलते उन्हें अगले 2-3 दिन अस्पताल में निगरानी में रखा जाएगा। वहीं, उनकी बिगड़ती तबीयत की खबर ने भक्तों को चिंतित कर दिया है।

डॉक्टरों की सलाह: घबराने की जरूरत नहीं

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सिनर्जी हॉस्पिटल के एमडी डॉ. कृष्ण अवतार ने जानकारी दी कि स्वामी रामभद्राचार्य को मंगलवार शाम अस्पताल लाया गया। शुरुआती जांच में उनके सीने में संक्रमण पाया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी डायबिटीज और हृदय रोग से जुड़ी सभी जांचें हो चुकी हैं और स्थिति नियंत्रण में है।

हालिया स्वास्थ्य समस्याएं

आपको बताते चलें कि यह पहली बार नहीं है जब स्वामी रामभद्राचार्य को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई हो। फरवरी 2024 में, हाथरस में एक कथा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें एम्स दिल्ली ले जाया गया था। इससे पहले 2017 में उनकी बाईपास सर्जरी भी हुई थी।

एक ऐसा प्रेरणादायक व्यक्तित्व, जिसके पीछे हैं लाखों भक्त

स्वामी रामभद्राचार्य के स्वास्थ्य को लेकर भक्तों में गहरी चिंता है। बड़ी संख्या में लोग तुलसी पीठ और अस्पताल में उनके हालचाल जानने पहुंचे हैं। इसकी एक बड़ी वजह है स्वामी रामभद्राचार्य का जीवन संघर्ष और उपलब्धियां। उन्होंने बचपन से नेत्रहीन होने के बावजूद 22 भाषाओं में महारत हासिल की और 250 से अधिक ग्रंथों की रचना की। वह तुलसी पीठ के संस्थापक हैं और चित्रकूट में दिव्यांगों के लिए समर्पित “जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय” की स्थापना भी की है।

राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका

यही नहीं, बल्कि स्वामी रामभद्राचार्य ने राम जन्मभूमि विवाद में एक निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने वेदों और धार्मिक ग्रंथों के उद्धरण देकर विवादित स्थल को भगवान राम की जन्मस्थली सिद्ध किया। उनके तर्क और प्रमाण न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले में महत्वपूर्ण साबित हुए। उनके योगदान को “भारतीय प्रज्ञा का चमत्कार” कहा गया।

पुरस्कार और सम्मान

स्वामी रामभद्राचार्य को 2015 में भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनके साहित्य और धर्म के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं। उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा और उनके समाज में उनके योगदान, भारतीय धर्म और संस्कृति के लिए अमूल्य हैं।

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